गोरखपुर,( कुलसूम फात्मा )  शासन ने 3 सदस्य समिति बनाकर दवा कंपनियों के मनमाने दाम पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया अब दवाओं की कंपनियां मनमाना दाम नहीं कर सकती हैं। शासन के निर्देश पर प्रदेश के ड्रग कंट्रोलर ने दवाओं के रेट पर कंट्रोल के लिए तीन विशेषज्ञों की समिति बनाई इसके साथ ही उन्होंने दवा विक्रेता समितियों को पत्र लिखकर इस काम में सहायता भी मांगी है।  दवाओं की मार्केट में दवाओं के दामों में काफी असमानता मिलती है। बीमारी की टेबलेट टिप्टोमर की 10mg तथा 25mg के रेट बराबर है। और थायराइड की दवा थायरोनार्म के 75mg के रेट 100mg से ज्यादा है। यही नहीं बल्कि दर्द निवारक मलहम वालिनी जेल के 15 ग्राम के दाम 10 ग्राम से डबल से भी अधिक है। और इस बात की शिकायत दवा कमेटी ने ड्रग कंट्रोलर से की थी।

 

 

 

नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी, शेड्यूल्ड ड्रग प्राइस तथा नॉन शेड्यूल्ड ड्रग फार्मूलेशन की मेडिसिन रेट की जांच कराने का निर्णय लिया गया है। इन दवाओं की जांच के लिए कमेटी में गोविंद राय, विमल चंद्र पांडेय तथा विवेक कुमार पांडे को भी सम्मिलित किये गये। तीनों सदस्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में जाकर एक ही दवा के भिन्न-भिन्न पैकेट के रेट की तुलना करने के साथ-साथ बाकी गड़बड़ियों की भी जांच करेंगे और दवा व्यापारियों से मुलाकात करेंगे साथ ही जानकारियां हासिल करेंगे।

 

 

कंपनियों की मनमानी पर लगेगी रोक –

उपर्युक्त निर्णय के द्वारा कंपनियों की मनमानी पर रोक लगेगी कम एमबी की दवा ज्यादा दाम में और अधिक एमजी की दवा कम दाम में मिल रही है। एक ही दवा भिन्न-भिन्न ब्रांडो की है तो उसके दाम में काफी असमानता भी है। डॉक्टर के लिखने के अनुसार मरीज महंगी दवाओं को खरीदने के लिए महंगी दवा लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं हालाकि एक तरह की दवाओं के दाम तकरीबन बराबर होने चाहिए। फिर वह दवा किसी भी कंपनी की चाहे हो। बताया जा रहा है उपर्युक्त कार्य में दवा व्यापारी पूरा सहयोग करेंगे।

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