गोरखपुर,( कुलसूम फात्मा ) कोरोना संक्रमण में लोगों की जिंदगी को तबाह कर दिया है। पिछली बार तिगुना किराया देकर लौटे थे और 4 महीने इंतजार करने के बाद वापस गए और फिर नए सिरे से काम को तलाश करना पड़ा। वर्तमान समय में फिर वही स्थित आ गई है। घर पहुंचने के लिए गृहस्ती का सारा सामान बेच दिया और किराए का इंतजाम किया। जिंदगी सलामत रहेगी तो रुपए दोबारा आ जाएंगे। लेकिन जिंदगी चली गई तो जिंदगी दोबारा ना मिलेगी।

 

 

 


यह लफ्ज़ सिद्धार्थनगर तथा गोरखपुर लौट रहे सैलून और बेकरीकर्मियों के हैं। इन बेकरीकर्मी की कानपुर के रामादेवी फ्लाईओवर पर कुछ देर के लिए गाड़ी रोकी गई तो उन्होंने पानी की बोतल को भरा और आगे के लिए चल पड़े। सिद्धार्थ नगर निवासी ऑटो चालक अमरजीत सिंह यादव सैलून में कार्य करता है। मुकेश शर्मा के अनुसार मुंबई में लॉकडाउन जैसी स्थिति पैदा हो चुकी है और काम पूर्ण रूप से बंद हो गया है। जमा पूंजी और राशन भी खत्म हो गया है। वहां रुकना बिल्कुल भी सही नहीं है। पूर्व लॉक डाउन हो जाता तो मुसीबत और भी बढ़ जाती।गोरखपुर निवासी दुर्गेश तथा चंचल बेकरी का कार्य करते हैं। उन्होंने कोरोना जैसी आफत से घबरा कर घर लौटने का मन बनाया तो बस वाले ने ढाई हजार रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से किराया मांगा। सभी ने गृहस्ती का सामान बेचा और 20,000 रू मिलाकर पिकअप करी और पीछे डाले में बैठकर वह घर की ओर चल दिए।

 

 

 

निजी बसों के संचालकों की मनमानी –


यही नहीं बल्कि निजी बसों के संचालकों की मनमानी कोरोना जैसी मुसीबत में वह मनमाना किराया वसूल रहें हैं यही तक नहीं वादा कर रास्ते में कहीं भी उतार देते हैं। मंगलवार को वह किसी तरीके से प्रयागराज पहुंचे और यात्रियों ने कहा नागपुर से प्रयागराज तक टिकट बनाया था, परंतु रीवा में चेकिंग होने लगी तो बस वालों ने हमें वही उतार दिया।

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