आधिकतर आपने  सुना होगा जीवन में सफलता की वजह  गरीबी होती है या फिर सुहाने सपने लेकिन यह कहानी बाकी कहानियों से अलग है। जी हां हम बात कर रहे हैं सिब्तैन मुस्तफा की जो एक शाही परिवार से संबंध रखते हैं। इस बात का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं लखनऊ के सादिक अली नवाब की   बेटी का ब्याह इनके पिता के साथ हुआ। लेकिन पिता की बुजुर्गी आते आते  रियासत का भी दौर खत्म हुआ। और जब खानदान वाले धन समेटने में लगे थे तब ये राजधानी लखनऊ शहर में इल्म हासिल करने में लगे थे किस्मत तो सबकी बाहें फैलाए खड़ी होती है, बस आपको ही संघर्ष कर किस्मत को गले लगना होता है, और अगर संघर्ष करने  में  आप सफल  हो गए  तो किस्मत के गले लगने से आपको कोई  नहीं  रोक सकता है। (कुलसुम फात्मा )

 

 

 

इल्म के लिए माँ-बाप होते हुए भी  रहे अनाथालय में –

सिब्तैन मुस्तफा यूपी  जनपद अमेठी गांव बहुवा के रहने वाले है और तालुकेदार के बेटे हैं किसी भी चीज़ की कमी ना होते हुए भी अपनी किस्मत बनाने के लिए अपने नाम के लिए राजधानी लखनऊ शहर में जाकर अपने मामा के यहाँ रहे, 12 वीं क्लास के बाद  आपने उस जमाने में बीटीसी की ट्रेनिंग की, और तुरंत नौकरी न मिलने के कारण सिब्तैन मुस्तफा यतीम खाने में रहे ट्यूशन के साथ साथ टीचिंग भी की जिससे इनका खर्च निकल जाता था। यह उर्दू के साथ मैथ में काफी निपुण थे। इनकी निपुणता मैथ में हम इस तरह बता सकते हैं की अपने खेतों में अनाज का अन्दाजा़ खेत में जाकर धान के फल से निकले दाने से कुल खेत मे अनाज कितना निकलेगा अंदाजा लगा लेत थे। प्रशिक्षण के बाद रोजगार के लिए जगह-जगह वैकेंसी में अपलाई किया करते थे और इनकी मेहनत का फल ऑफर लेटर के रूप में आया, ये ऑफर लेटर एक नहीं बल्कि दो-दो जगहों से आया , क्राइम ब्रांच, और टीचर के लिए आया था। उन्होंने क्राइम ब्रांच की नौकरी छोड़ दी

 

 

अध्यापक बनने का समाज कारण था।

उन्होंने बताया  टीचिंग ज्वान करने का मकसद  अपनी जिंदगी से कई जिंदगीयों को रोशन करना चाहते थे नोकरी मिलने के बाद स्कूल में बच्चों को पढ़ाते और घर में भी बच्चों को मुफ्त ट्यूशन मैथ का देते। चुंकि समाज सेवा का शोक था और जो तकलीफ़ खुद ने सही जितना हो सके सहयता कर बच्चों को शिक्षित करना ही मकसद था

चूकिं स्पोर्ट्स खेल में काफी रुचि रखते थे  इसलिए टीचिंग के दौरान स्काउट की ट्रेनिंग देते हुए  जिला लेवल के साथ मंडल लेवल तक बच्चों को ले जाकर प्रतियोगीता में भाग दिलाया मंडल और डिस्ट्रिक्ट लेवल तक  नाम भी कमाया ।

 

 

 

आर्थिक तंगी से जूझ रहे बच्चों की मुफ्त पढ़ा कर की सहयता

अपने बच्चों की जिंदगी रोशन करने के साथ अन्य बच्चों की आर्थिक सहायता के साथ-साथ मुफ्त शिक्षा प्रदान की और  उन्नति दिलाई वर्तमान समय में इनसे पढे़ हुए बच्चे इंजीनियर डाक्टर, ऑफिसर हैं अलग-अलग पोस्ट पर ये आज भी कार्यरत हैं।

 

 

 

मास्टर सिब्तैन मुस्तफा अपनी जिंदगी से दूसरों की जिंदगी रौशन करने का रखते थे शौक 

एक बार तबीयत ज्यादा खराब हुई तो अपनी बेटी से सवाल पूछा मेरी जिंदगी से तुम लोगों को क्या मिला ? बेटी ने तुरंत जवाब दिया, पापा आपकी जिंदगी से हम सबको इल्म मिला। आपने हमें इल्म की ताकत दी आपकी जिंदगी ने हमें ऐसी रौशनी दी है की लड़कियां होते हुए इंडिपेंडेंट होकर खुद अर्न कर रहे हैं आपको लोग याद रखेंगे ।

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