राज्य सरकार बालू के संभावित किल्लत को देखते हुए उसका स्टाॅक करने में जुट गयी है। अगले माह से सूबे में तीन माह बालू का खनन बंद रहेगा, लिहाजा सरकार बालू का इतना स्टॉक कर लेना चाहती है कि किसी स्तर पर बालू का संकट न हो। इस समय नवादा, अरवल, बांका, किशनगंज, बेतिया, वैशाली, मधेपुरा और बक्सर कुल 8 जिलों में बालू का खनन हो रहा है। इसके अलावा विभाग ने 19 जिलों में 195 लोगों को बालू स्टॉक करने का लाइसेंस दिया है। इन्हें स्थानीय जरुरतों के आधार पर बालू का स्टॉक करने को कहा गया है।

 

खान एवं भूतत्व विभाग ने प्रदेश में बालू की कमी न होने देने के लिए 15.64 करोड घनफीट बालू का भंडारण किया है। यह विभाग द्वारा दिए गए लाइसेंसधारियों के पास संग्रहित हैं। बिहार में हर माह 4 से 5 करोड़ घनफीट बालू की खपत होती है। इसके आधार पर विभाग ने कम से कम 15 करोड़ घनफीट बालू के स्टॉक की योजना बनाई है। इसी आधार पर 19 जिलों में बालू का स्टॉक किया गया है।

 

एनजीटी के प्रावधानों के तहत बिहार में पहली जुलाई से 30 सितंबर तक नदियों में बालू का खनन नहीं होगा। यह अवधि बिहार में मानसून का होता है और नदियों में काफी पानी होने के कारण खनन कार्य बंद किया जाता है। लिहाजा, तीन माह तक बालू खनन पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है। इस दौरान किसी बंदोबस्तधारी के नदी में जाकर बालू निकालने पर पूरी तरह रोक रहती है। ऐसे में जरूरतमंदों को पहले के स्टॉक से ही बालू की आपूर्ति की जाती है।

 

एनजीटी के नियम के आधार पर ही विभाग खनन की जगह भंडार से प्रदेश के बाजारों में बालू की आपूर्ति करता है। अभी सूबे में लगभग 20-22 दिनों तक खनन हो सकेगा। इसके बाद 1 जुलाई से बंद हो जाएगा। उधर, विभाग का दावा है कि किसी भी जिले में बालू का संकट नहीं है। न ही किसी कार्य विभाग से बालू की किल्लत की शिकायत मिली है।

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