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राजस्व भूमि सुधार विभाग ने 130 नए अंचलों में सर्वेक्षण  कार्य प्रारंभ कर दिया है। अब जमीन से संबंधित विवाद भी समाप्त हो जाएंगे। और जमीन से संबंधित विवादों को समाप्त करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से जमीन को चिन्हित करने के साथ सीमांकन और राज्य में वर्तमान समय में चल रहे भूमि सर्वेक्षण का दायरा अब 220 जो़न तक बढ़ा दिया गया है। बता दें अभी तक तकरीबन 20 जिलों के 90 जोन में सर्वेक्षण कार्य चलाया जा रहा है और दूसरे चरण में 18 जिलों को भी सम्मिलित किया गया है।

 

 

 

गवर्नमेंट के इस खास कदम से तकरीबन 1 साल के अंदर आधे बिहार राज्य में जमीन की पहचान कर ली जाएगी इस व्यवस्था द्वारा पहचान के बाद हदबंदी जैसे विवादों की संभावना ख़त्म होगी।जिन 90 जोन में कार्य हो रहा है उनमें 208 कैंपस से जुड़े 5 हजा़र से ज्यादा गांवों में किस्तवार कार्य कराया जा रहा है जिससे बारिश के वजह से फील्ड वर्क एकदम रुक गया है। जहां बाढ़ आने के कारण लोगों के घर अस्त-व्यस्त हो गए हैं और भुखमरी आ गई है वहीं दूसरी तरफ बाढ़ आने के कारण काम भी प्रभावित हुआ कैंपस में कार्य कर रहे मानव बल का पूरा उपयोग भी किया जा सके। इसलिए दूसरे चरण के कैंपस को बनाया जा रहा है।

 

 

बता दें इस सर्वे से जुड़े हुए टेबुल वर्क को पूर्ण कराने खातिर भू अभिलेख तथा परिमाप निदेशालय से जानकारी मिली। के सर्वेक्षण के लिए अब 130 जो़न में तकरीबन दो दर्जन राजस्व ग्राम पर एक केंपस बनाया जा चुका है और हर कैंपस में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी की देखरेख में राजस्व कर्मी सर्वेक्षण कार्य कर रहे हैं।  साथ ही जमीन को नापने और सर्वे ग्राम लेवल पर ऑब्जेक्शन या दावा लेना दस्तावेजों को मिलाना अन्य कार्य सर्वे की प्राथमिक प्रशासनिक इकाई कैंपस को ही सौंपी गई है। उपर्युक्त कार्य पूर्ण होने के पश्चात बिहार राज्य में जमीन से संबंधित विवाद की समाप्ति जल्दी होगी।

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