बिहार वासियों के लिए एक बहुत ही बड़ी खबर है। आने वाले समय में बिहार में बिजली का संकट पूरी तरह से समाप्त करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने एक बहुत ही बड़ी परियोजना को हरी झंडी दी है। बिहार की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना जिसका नाम डागमारा बिजली परियोजना है इसका शिलान्यास जल्द ही होने जा रहा है जिसका एमओयू एनएचपीसी और बीएचपीसी के बीच साइन किया गया है। बिहार के ऊर्जा सचिव संजीव हंस और एनएचपीसी के सीएमडी एके सिंह ने इस पर हस्ताक्षर कर दिया है।

 

 

5 वर्ष में इस पूरे परियोजना के निर्माण के लिए समय सीमा रखा गया है। यह परियोजना बिहार के सुपौल जिले के भपटियाही ब्लॉक स्थित कोसी बराज से तकरीबन31 किलोमीटर डाउनस्ट्रीम में इस परियोजना का निर्माण होगा। इस परियोजना पर ढाई सौ करोड़ से भी अधिक का निवेश होना है। बिहार के कैबिनेट बजट में इसके लिए 700 करोड़ रुपए का अनुदान दिया है।

 

 

इस परियोजना के पूरे होने से बिहार में 130.1 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। जिससे 7.65 मेगावाट की 17 यूनिट स्थापित की जाएगी। ऊर्जा मंत्री से मिली जानकारी के अनुसार इस डागमारा पनबिजली परियोजना से 130.1 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।जिसमें 22 फीसद बिजली नेपाल को दी जाएगी।

 

 

शेष बिजली यानी 78% बिजली बिहार को मिलेगी। हम सभी जानते हैं कि कोसी नदी बिहार का शोक नदी के रूप में जाना जाता है, लेकिन यह परियोजना पूरे कहानी को बदल कर रख देगी। आने वाले समय में यह कोसी नदी जीवनदायिनी नदी के रूप में जानी जाएगी, हम आपको बता दें कि हिमालय के वेसिन से निकलने वाली नदियों पर बनने वाला देश का यह पहला प्रोजेक्ट है।

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