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बिहार राज्य में हजारों हेक्टेयर जमीन ऐसी हैं जिस पर किसी का मालिकाना हक नहीं है, वह जमीन मथुरा मंदिर के लिए छोड़ा गया है। जिस पर कई जिलों में मंदिर ही या मटका सेवन करने वाले सेवादार ने जमीन का मालिकाना हक जताते हुए दूसरे व्यक्ति को रजिस्ट्री कर दिया है।

 

ऐसे जमीनों की बिक्री को रोकने के लिए बिहार में नोडल पदाधिकारी की तैनाती की गई है जिसमें एसडीओ डीएसएलआर एवं अंचल अधिकारी को सदस्य के रूप में चुना गया है। भागलपुर जिले से कुछ मामले आए हैं जहां मठ मंदिर के जमीन को बेचा गया है जिस पर एक्शन लेते हुए एक समीक्षा बैठक में मंत्री द्वारा यह आदेश जारी किया गया है कि ऐसे जमीन जो कि मठ मंदिरों के नाम से है उन्हें धार्मिक न्यास बोर्ड द्वारा देखरेख किया जाए।

 

धार्मिक न्यास बोर्ड के द्वारा बिहार के अलग-अलग जिलों में मठ एवं मंदिरों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है इसके लिए प्रस्ताव धार्मिक न्यास बोर्ड को भेजा जा चुका है। नई प्रक्रिया के तहत अगर किसी भी मंदिर के सेवादार द्वारा जमीन को बेचा गया है तो उसकी जमाबंदी रद्द हो जाएगी तथा जमीन वापस धार्मिक न्यास बोर्ड के देखरेख में रखा जाएगा।

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