सोमवार, नवम्बर 29

भारत में रेलयात्रियों का सफर नहीं होगा आसान, इस प्रकार की ट्रेनों के साथ रेलवे शुरू कर सकती है संचालन

को’रोना वा’यरस के चलते लागू लॉकडाउन अगर 3 मई के बाद खुला तो ट्रेनों का संचालन भी शुरू हो सकता है। जिससे दूसरे शहरों में फंसे लोग अपने शहर वापस अपनों के पास जा सकेंगे। लेकिन लॉकडाउन के बाद रेल का सफर करना अब इतना आसान नही रहेगा। रेल में सफर से पहले यात्री को कई मानकों का पालन करना होगा। रेलवे तमाम मानकों को ला’गू करने पर विचार कर रहा है।

लॉकडाउन के बाद शताब्दी, गतिमान और तेजस एक्सप्रेस के साथ ही राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेनों में सफर के दौरान रेलवे अपने यात्रियों को केवल सादे पानी की आपूर्ति पर भी विचार कर रहा है। जिसके चलते यात्रियों को खाना अपने साथ ही लाना पड़ सकता है। इस दौरान इन ट्रेनों में शारीरिक दूरी का पालन भी एयरलाइन्स की तर्ज पर होगा। यानी एक चेयरकार की सीट के पीछे दूसरे यात्री को बैठाया जाएगा।

दरअसल रेलवे बोर्ड लॉकडाउन के बाद कुछ चुनिंदा रूटों पर ही सीमित संख्या में ट्रेनों को चलाने की गाइड बनाने पर मंथन कर रहा है। जानकारी के मुताबिक जनरल और स्लीपर क्लास की ट्रेनों की बोगियों में तो शारीरिक दूरी के लिए वेटिंग लिस्ट और मिडिल कंफर्म सीटों को हटाने की बात भी चल रही है। हालांकि अभी इसको लेकर कोई औपचारिक दिशा निर्देश जोनल मुख्यालयों को जा’री नहीं हुए हैं।

रेलवे बोर्ड के सीनियर अधिकारियों की अगर मानें तो को’रोना वा’यरस के चलते ट्रेनों में एसी क्लास बोगियों में सेंट्रल एसी होती है। ऐसे में इस एसी को नहीं चलाया जा सकता। क्योंकि सेंट्रलाइज एसी से भी कोरोना फैलने का डर रहता है। ऐसे में बिना एसी के पूरी तरह बंद बोगी में यात्री घुटन और भी’षण तपिश में सफर भी नहीं कर पाएगा। जिसके चलते एसी क्लास बोगियों के शीशे भी हटाए जा सकते हैं। यानी ट्रेनें नॉन एसी हो सकती हैं। ऐसे स्थिति में किराए का जो अंतर होगा उसे यात्रियों को वापस कर दिया जाएगा।

आइआरसीटीसी के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक अश्विनी श्रीवास्तव ने बताया कि शताब्दी, गतिमान, तेजस और राजधानी को लॉक डाउन हटने के बाद एयरलाइन्स की तर्ज पर शारीरिक दूरी का पालन करते हुए चलाया जा सकता है। इस ट्रेन में सतर्कता के तहत यात्रियों को सिर्फ पानी देने पर विचार किया जा रहा है। अभी खाना न देने को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया है।