पाकिस्तान से भारत हर वर्ष टिड्डीयों का झुरमुट आता है। वह भी बड़ी तादाद में और फसल नष्ट कर देता है जी हां ये टिड्डीयां रास्ते में आने वाले हजारों एकड़ खेतों की फसलों को चट कर जाती हैं। बिहार के भागलपुर स्थिति बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर एक नई परियोजना पर कार्य कर रहा है। इसका मकसद केवल यह है 3 से 4 घंटे पूर्व आने वाली टिड्डीयों के आगमन की सूचना मिल जाए इन्हें ड्रम सायराना की आवाज से भगाया जाएगा। भागलपुर के ट्रिपल आईटी संस्थान का भी इसमें सहयोग लिया जा रहा है।

 

 

 

बीएयू में एग्री हेकथोन का कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। और यह देश में अपने तरीके से पहला कार्यक्रम था। इससे संबंधित विश्वविद्यालय के पीएचडी के छात्रों शिवम ने आईडिया प्रस्तुत किया। इसे कार्य करने के लिए चुना भी गया। बीएचयू के कुलपति डॉ आर के शोभा ने कहा पाकिस्तान से आने वाली टिड्डीयों का दल हजारों एकड़ फसल नष्ट कर देता है। इस परेशानी से निजात पाने के लिए इस आइडिया पर शोध के लिए चुना गया है।

 

 

 

आइए जानते हैं यह टिड्डीयां भागेंगी कैसे ?

ध्वनि तरंगों के जरिए यह पता किया जाएगा की ये टिड्डीयों का दल कितनी दूर है। इसके लिए खेतों की मेड़ पर फोन लगाए जाएंगे और इनमें ऑप्टिकल सेंसर भी लगाए जाएंगे। टिड्डियों की फ्रीक्वेंसी ग्रहण कर सिगनल सॉफ्टवेयर तक पहुंचेगा। इसके पश्चात खुद ब खुद साथ लगी बेल से ड्रम सायरन बजने लगेगा। इन आवाजों को सुनकर टिड्डियों का दल भाग जाएगा।

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