हरियाणा में रहने वाली काजल बचपन से ही डॉक्टर बनने के ख्वाब देखती लेकिन काजल ज्वाला के तकदीर में जनता की सेवा लिखी थी उनके पिता के द्बारा कहा गया केवल एक लफ्ज़ काजल के दिमाग में बैठ गया पिता ने कहा था बेटा ” तुममे काबिलियत है आईएएस बनने की और तुम बन सकती हो ” इस बात से प्रेरित होकर काजल ने कुछ ऐसा कर दिखाया के पिता की आंखें नम हो गई काजल अपने पिता की बात से प्रेरित होकर विप्रो जैसी बड़ी कंपनी में नौकरी करने के साथ यूपीएससी की तैयारी में जुनून और लगन के साथ जुटी रही चूकि घर की आर्थिक स्थिति ठीक ना थी इसलिए इन्होंने नौकरी नहीं छोड़ी।

 

 

शादी के बाद यूपीएससी टॉपर

 

जॉब के दौरान इनकी 2016 में ही शादी हो गई। परंतु काजल ने अपनी सक्सेस और तैयारी के बीच नहीं आने दिया। समाज की सोच लड़कियों के लिए यही है कि शादी के बाद सक्सेज़ हासिल करना बहुत बड़ी बात है या शादी के बाद एक लड़की पढ़ नहीं सकती लेकिन काजल ने इसे भी गलत साबित कर दिया जी हां उन्होंने शादी के बाद यूपीएससी की तैयारी की और सक्सेस हासिल की।

 

 

काजल का इस शख्स ने की थी सहायता


वह शख्स जिसने काजल की सहायता और सहयोग किया है, वह काजल के पिता हैं कहती हैं मेरे पिता ने इंडिया की अमेरिकन एंबेसी में कार्य करते हुए भी बेटी की शादी के बाद वो सारे कार्य किए जो एक पिता करता है और वह काम भी किए जो एक पित नहीं करता है जैसे की घर में खाना बनाना हो और झाड़ू पोछा करना शादीशुदा जिंदगी में खुशहाल रहने के साथ-साथ बाप का साथ मिला और उन्होंने पढ़ाई जबरदस्त तरीके से की

 

 

कहा यूपीएससी का सिलेबस समुद्र की तरह है –


काजल ने इंटरव्यू के दौरान बताया यूपीएससी का सिलेबस समुद्र की तरह है जिसकी कोई सीमा नहीं है, इसकी शुरुआती तथा मुख्य परीक्षा में हर एक सब्जेक्ट का अध्ययन बहुत आवश्यक है जिसमें से एनसीआरटी की किताबें रामबाण की तरीके से कार्य करती हैं और इंटरव्यू में हर प्रतियोगी को हर क्वेश्चन का जवाब शांति पूर्ण तरीके और समझदारी के साथ देना पड़ता है।

 

मिली हार के बाद भी नहीं मानी,हार

काजल ने यूपीएससी के इंटरव्यू में बताया पहली रैंक पाने वाली कनिष्क कटारिया को भी पीछे छोड़ दिया और 201 अंक प्राप्त किया वहीं कनिष्क ने 179 अंक रिटेन परीक्षा में काजल को 1750 में 850 नंबर मिले थे उन्होंने कहा उनकी जिंदगी में काजल अपने पिता को बहुत ही आदर्श मानतीे हैं और बाहरी जीवन में यदि देखा जाए तो डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम को अपनी सक्सेस का पूरी तरीके से श्रेय वह अपने पिता के साथ अपने परिवार वालों को देती हैं ।

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