आपको पता ही होगा अब तक वाहन पेट्रोल डीजल से चलते थे, परंतु धीमे-धीमे पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए और डीजल पेट्रोल की खपत कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन प्रारंभ हो गया है। इसके साथ ही भारतीय रेलवे ग्रीन ऊर्जा को भी बढ़ावा देने तथा डीजल की खपत को कम करने के लिए रेलवे लाइनों का भी विद्युतीकरण किया जा रहा है।

 

 

हाइड्रोजन फ्यूल सेल की विशेषता –

जल्द ही रेलवे नेशनल हाइड्रोजन एनर्जी मिशन के द्वारा हाइड्रोजन फ्यूल सेल का प्रयोग करना प्रारंभ कर रही है क्योंकि रेलवे का मकसद खर्च कम करने के साथ-साथ पर्यावरण के हिसाब से उर्जा का इस्तेमाल करना है। रेलवे ने नेशनल हाइड्रोजन एनर्जी मिशन के द्वारा हाइड्रोजन फ्यूल सेल का इस्तेमाल शुरू कर दिया है जिसके लिए बोली भी आमंत्रित की गई है। बता दें केंद्रीय बजट में इसकी घोषणा की जा चुकी थी और हाइड्रोजन फ्यूल सेल ने तकनीक की विशेषता यह है के इसमें कार्बन डाइऑक्साइड का उत्पादन जीरो होता है तथा यह पर्यावरण को देखते हुए काफी सुरक्षित है।

 

 

शनिवार को रेल मंत्रालय ने कहा उत्तर रेलवे के 89 किलोमीटर सोनीपत जिंद खंड में डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट पर रेट्रेफिटिंग करके हाइड्रोजन फ्यूल सेल पर आधारित तकनीकी के लिए निविदा भी जारी कर दी गई है। और इसमें सर्वप्रथम यह देखा जाएगा क्या मौजूदा डीजल से चलने वाली ट्रेनों को हाइड्रोजन का इस्तेमाल करने के लिए रेट्रेफिट किया जा सकता है। इसके पश्चात में दो हाइब्रिड नैरोगेज इंजनों को हाइड्रोजन ईंधन सेल पावर मूवमेंट के जरिए परिवर्तित किया जाएगा। उपर्युक्त प्रक्रिया द्वारा रेलवे का खर्च कम होगा और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा का प्रयोग हो सकेगा।

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