बिहार,( कुलसूम फात्मा ) खुशखबरी अब उद्यान निदेशालय पटना के निर्देश पर मखाना एरिया विस्तार प्लान के तहत जिले में 2020- 21 के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है इस लक्ष्य के जरिये तकरीबन एक सौ हेक्टेयर में मखाने की खेती होगी, इससे जिले में मखाने की खेती को बढ़ावा मिलेगा और ये कार्य योजना के हिसाब से खेती होगी । इन खेती पर किसानों को गवर्नमेंट के जरिए अनुदान भी दिया जाएगा। बताया जा रहा है की विभाग का मानना है मखाना खेती पर तकरीबन 27 हजार 200 की लागत प्रति हेक्टेयर आती है। जिसके लिए गवर्नमेंट 50,%13600 अनुदान की राशि देगी ।

 

 

विभाग ने सुपौल किशनपुर तथा सरायगढ़ के साथ-साथ भटियाही को भी दी प्राथमिकता।

लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभाग ने जिले के तीन प्रखंड सुपौल, सरायगढ़, किशनपुर तथा भटियाही को प्रार्थमिकता दी इसके साथ ही अन्य ब्लॉक के किसानों के जरिए पोखर में की जाने वाली मखाने की खेती के लिए भी अनुदान देने का निर्णय लिया है। सरकार के जरिए मखाना की खेती पर अनुदान देने की व्यवस्था के बाद किसानों में काफी खुशी का माहौल है जिसके वजह से कोरोना संक्रमण के पश्चात जिले के किसान मखाना खेती को लेकर आगे आ रहे हैं। बता दें मखाना खेती के लिए चारों क्षेत्र के साथ-साथ जलवायु रहने के पश्चात भी गवर्नमेंट के जरिए इस दिशा में पहल नहीं की जाती थी। लेकिन इसकी दूसरी वजह ये थी की किसान मखाने की खेती में अपनी रुचि भी नहीं दिखाते थे। गत वर्ष गवर्नमेंट के जरिए केवल 10 हेक्टेयर खेतों में मखाना लगाने के लिए लक्ष्य दिया गया था, जिसे इस साल बढ़ा दिया गया है और 100 हेक्टेयर कर दिया गया है।

 

 

और खास बात तो यह है इस खेती के लिए उन किसानों को प्राथमिकता दी जा रही है जिसे प्रगति रिपोर्ट के जरिए चयन किया गया था। इस खेती में आमदनी अच्छी होने की वजह से किसानों का रुझान बढ़ता नज़र आ रहा है इसके साथ ही मखाना खेती को सही तरह से करने के लिए भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय पूर्णिया को नोडल केंद्र  बनाया गया है जिससे किसानों को खेती की टेक्निक और जानकारी मिल सके।

ऐसे करें आवेदन – मखाना खेती के लिए अनुदान पाने वाले किसानों से विभाग के जरिए आवेदन लिया जा रहा है जिसमें किसानों को आवेदन के साथ भूस्वामी प्रमाण पत्र तथा उद्घातन रसीद और आधार कार्ड, फोटो तथा बैंक पासबुक और फोटो कॉपी संलग्न करनी होती है। इसके साथ मखाना खेती करने वाले जिलों को 100 हेक्टेयर का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। उसमें एक 11.122 हेक्टेयर सामान्य जाति किसान के लिए और 2.144 अनुसूचित जाति के लिए 0.134अनुसूचित जनजाति किसानों के लिए लक्ष्य निर्धारित हुआ है।

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