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बिहार राज्य में एक ऐसा रेलवे स्टेशन है जहां के लोगों को ट्रेन के सीटी की आवाज सुने हुए 14 साल बीत गए, आज जब अचानक इस रेलखंड पर जब ईस्टर्न रेलवे के द्वारा रेल इंजन का ट्रायल किया गया तो लोगों को अपने काम पर भरोसा नहीं हुआ तथा ट्रेन की सीटी की आवाज सुनने के बावजूद लोग स्टेशन पर ट्रेन को देखने पहुंच गए।

 

यह कहानी रामायण की तरह प्रतीत होती है जिस प्रकार मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम 14 वर्षों का वनवास काटकर वापस लौटे थे और जिस प्रकार उत्सव मनाया गया था वापस लौटने का उसी प्रकार का उत्सव आज फारबिसगंज सहरसा रेलखंड फारबिसगंज से प्रतापगंज रूट के नरपतगंज मे देखने को मिला, 14 वर्षों के बाद इस रूट पर ट्रेन की सीटी सुनाई देने के बाद लोग उत्सव मनाने लगे।

 

रेल अधिकारियों के द्वारा मिली जानकारी के अनुसार ललित ग्राम से नरपतगंज तक इसी साल अप्रैल के महीने में ट्रेनो का परिचालन शुरू हो जाएगा, फारबिसगंज तक दिसंबर 2022 में इस रूट पर ट्रेनों का परिचालन शुरू होने की संभावना है।

साल 2008 मे कोसी नदी के द्वारा हुए जल प्रलय से जान माल के साथ-साथ ट्रेनों के आवागमन व्यवस्था भी पूरी तरह से बंद हो गई। इस जल प्रलय में फारबिसगंज से लेकर नरपतगंज होते हुए प्रतापगंज के क्षेत्रों में कई रेल खंडों को तहस-नहस कर दिया, जिसके बाद ट्रेनों का आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया। रेलवे द्वारा 20 जनवरी 2014 को ही रेलखंड के निर्माण के लिए मेगा ब्लौक लिया गया था।

 

यह मेगा ब्लॉक फारबिसगंज से राघोपुर रेलवे स्टेशन के करीब 48 किलोमीटर तक के रेलखंड के लिए लिया गया था, अब जल्द ही इस रेलखंड के यात्रियों के लिए रेलवे परिचालन शुरू होने की खुशखबरी मिलने वाली है, इस परिचालन के शुरू होने से फारबिसगंज से चकरदाहा हाल्ट, देवीगंज नरपतगंज छातापुर हाल्ट ललित ग्राम और राघोपुर से सहरसा का सीधा संपर्क ट्रेनों के माध्यम से स्थापित हो जाएगा।

 

प्रतापगंज से सरायगढ़ थरबिटिया सुपौल इन क्षेत्रों के व्यापारियों एवं किसानों के लिए ट्रेनों के माध्यम से सामान को बाजार में पहुंचाने की सुविधा मिल जाएगी, जिससे इन इलाकों में व्यापार को बढ़ावा मिलेगा तथा आसपास के क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर भी उपजेंगे।

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