बिहार,( कुलसूम फात्मा )   कानून के अनुसार पत्नी अपने पति से हमेशा की तरह गुजारे भत्ते का दावा करती चली आ-रही है। परंतु अब की बार कुछ अलग ही मुजफ्फरपुर की कोर्ट ने  किशोरी लाल बनाम मुन्नी देवी के वाद में निर्णय दिया। मुजफ्फरपुर की कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा यदि पत्नी रोजगार है या फिर उसको पेंशन मिल रही है तो वह देगी अपने पति को गुजारा भत्ता।

 

 

 

अधिवक्ता बालेश कुमार तायल ने बताया कि –
किशोरी लाल जो की निवासी खतौली का रहने वाला है । और मुन्नी देवी जो की कानपुर की रहने वाली थी दोनों 30 साल पूर्व एक बन्धन में बन गए थे। दोनों का ब्याह हिंदू रीति रिवाज के अनुसार हुआ था। शादी के कुछ समय पश्चात दोनों के मध्य किसी बात को लेकर विवाद हो गया। विवाद के पश्चात ही दोनों अलग-अलग रहने लगे। जब विवाद हुआ तो उस दौरान मुन्नी देवी कानपुर में इंडियन आर्मी में चौथी श्रेणी की कर्मचारी थी । और वह अलग रह रही थी कुछ वर्ष के पश्चात मुन्नी देवी रिटायर हो गई रिटायरमेंट के पश्चात मुन्नी देवी को ₹12000 प्रति माह पेंशन मिलने लगी उधर किशोरी लाल के पास किसी भी प्रकार का आय का साधन नहीं था । किशोरी लाल ने फैमिली कोर्ट में वाद चलाया जो  7 साल चला और उस वाद में उसने गुजारे भत्ते की मांग की कोर्ट ने किशोरी लाल के हक में फैसला सुनाते हुए मुन्नी देवी को अपने पति को गुजारे भत्ते के लिए ₹2000 प्रतिमाह दिए जाने का आदेश दिया।

 

 

 

हालांकि किशोरीलाल कोर्ट के आदेश से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है। उसका कहना यह है  उसने वाद कर्ज लेकर लड़ा और लॉकडाउन में भी इधर उधर से उसने उधार लिया उसने कहा  उसका स्वास्थ्य भी अब पूरी तरह से ठीक नहीं रहता है जिससे  वह चाय का ठेला लगाए। उम्र भी अत्यधिक बढ़ चुकी है। उसने कहा  कोर्ट को  ₹2000 नहीं बल्कि पेंशन का चौथा भाग दिए जाने का आदेश दिया जाना चाहिए था। कोर्ट ने जो आदेश दिया है उससे वह पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है।

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