साहस है तो जीत है भोपाल में रहने वाली योग्यता की जिंदगी में उतार-चढ़ाव तो आए लेकिन योगिता ने हार ना मानी पढ़ने लिखने के बाद योगिता ने एक ऐसा कार्य चुना जो की पुरुषों के नाम से हमारे समाज में माना जाता है।

“जिंदगी ने जब दी शिकस्त तो योग्यता ने दिखाई स्त्री शक्ति”( कुलसूम फात्मा )

यहां हम तसकिरा कर रहे हैं। भोपाल में रहने वाली एक मां का जिनकी जिंदगी में उतार-चढ़ाव आए और दुखों का भी पहाड़ टूटा वर्ष 2003 में योग्यता के पति राजबहादुर की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। अभी यह दुख दूर ना होने पाया था भाई की भी मृत्यु हो गई। इन सभी मुश्किलों का सामना करते हुए योगिता को बच्चों का पेट भरने के लिए आमदनी का ज़रिया ध्यान में बात आई तो उन्होंने  ट्रक ड्राइविंग को चुना।

 

 

योग्यता ने कॉमर्स और  law से डिग्री की हासिल –

और ऐसा नहीं है की योगिता अनपढ़ है नहीं बल्कि 49 वर्षीय योग्यता ने कॉमर्स और law से डिग्री हासिल की है। और इसके अलावा इनके पास ब्यूटीशियन का भी एक सर्टिफिकेट मौजूद है। परंतु अच्छी कमाई के लिए इन्होंने ड्राइविंग को चुना अपने 15 साल के ट्रक ड्राइविंग कैरियर के बीच योगिता देश के आधे से अधिक राज्यों का सफर तैय कर चुकी है। बता दें हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती मराठी तथा तेलुगु भाषा भी इनको आती है। और यह सभी भाषा ड्राइविंग के दौरान ही उन्होंने सीखी।

 

 

योगिता रघुवंशी है दो बच्चों की मां –

15 वर्षों से ट्रक चला कर ये मां अपने बच्चों का भरण पोषण कर रही है जी हां योगिता भोपाल की रहने वाली हैं। उनके दो बच्चे हैं यह महिला काफी साहस और अकेले ड्राइविंग कर योगिता ने महिला सशक्तिकरण की मिसाल कायम कर दी। अपने सफर के दौरान यह कभी-कभी ढाबों पर खाने के साथ-साथ सड़क के किनारे पुरूषों के तरह खाना बनाकर खाती हैं और ट्रक में ही सोती है। सबसे बड़ी बात तो यह है की, यह सारा काम अकेले ही करती हैं। और रात के समय ट्रक में ही सोती हैं।

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