उद्यमी कह रहे हैं आदेश है अव्यवहारिक।

गोरखपुर,( कुलसूम फात्मा ) उद्यमियों को इस नए नियम का पालन करना होगा, जी हां, औद्योगिक विकास प्राधिकरण की तरफ से पेपर लेस बनाया जा रहा है। क्योंकि कुछ ऐसे कार्य हैं जिनके लिए बड़े पैमाने पर कागजात मांगे जा रहे हैं। नए नियम के अनुसार गिडा में अगर कोई उद्यमी 3 वर्ष तक फैक्ट्री संचालित करता है और उसके बाद उसे हस्तांतरित करना चाहता है तो ऐसे व्यक्ति को 1000 पन्ने का प्रपत्र देना पड़ेगा,इस आदेश को उद्यमियों ने अव्यवहारिक बताया है।

 

 

 

बैंक द्वारा कराना होगा अब सत्यापन।

उक्त नियम के द्वारा उद्यमियों को 3 वर्ष में मंगाए गए कच्चे माल की डिटेल तथा बिजली का बिल जीएसटी रिटर्न अन्य के साथ जुड़े डॉक्यूमेंट देने पड़ेंगे। प्रोजेक्ट गोरखपुर परिवर्तन को लेकर यह नए नियम बनाए गए हैं। गिडा के चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष आर्यन सिंह के अनुसार पूर्व प्रोजेक्ट परिवर्तन को लेकर एक आवेदन गीडा में देना होता था, जिसके पश्चात प्रोजेक्ट परिवर्तन की औपचारिकता पूर्ण रूप से पूरी हो जाती है। परंतु वर्तमान समय में बैंक से हस्ताक्षर का सत्यापन कराने का निर्देश दे दिया गया है।

 

 

 

 

गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण-

गीडा के सीईओ जिनका नाम पवन अग्रवाल है। उनका कहना है गीडा में कई कार्य ऑनलाइन भी होते हैं जिसके कारण यदि फैक्ट्री, ट्रांसफर तथा प्रोजेक्ट परिवर्तन करना है तो आवश्यक प्रपत्र उपलब्ध कराने होंगे, जिसकी संख्या एक हजार पन्ने की होगी।

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