भागलपुर,( कुलसूम फात्मा ) भागलपुर जंक्शन मामूली नहीं है बल्कि यह देश के हाथ स्टेशनों में सम्मिलित हो चुका है। पिछले दिनों ए ग्रेड स्टेशन में सम्मिलित होने वाले जंक्शन को अब रेलवे ने नन सब अर्बन ग्रेट की वैल्यू दे दी है।

 

 

बता दे की मालदा रेल मंडल में एनएसजी 2 की वैल्यू प्राप्त करने वाले प्रथम स्टेशन होगा। मालदा रेल मंडल मुख्यालय को एनएसजी 3 में सम्मिलित कर लिया गया है। nsg2 में सम्मिलित होने के पश्चात आने वाले समय में जंक्शन का स्वरूप पूरा बदल जाएगा। रेलवे प्रशासन की भागलपुर जंक्शन पर खास नजर रहेगी। पूर्व रेलवे जोन तथा मालदा मंडल के अंदर आने वाले भागलपुर, जंक्शन जोन का तीसरा तथा मालदा मंडल का सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला स्टेशन है और लॉकडाउन से पूर्व यहां यात्रियों के आवागमन हर दिन तकरीबन दो लाख के समीप था।

 

 

क्योंकि हावड़ा से भागलपुर के मध्य 18 सो 61 में रेल परिचालन हुआ था और भागलपुर जंक्शन का इतिहास इसलिए बहुत पुराना है। उस समय खाना जंक्शन राज महल से भागलपुर होकर ट्रेन चलती थी और सिंगल रेल लाइन बिछाई गई थी। कोयले के इंजन के साथ ट्रेन भागलपुर पहुंची थी। इसके पश्चात लाइन का को भी बढ़ाया गया। 18 सो 62 में मुंगेर तक हुआ। जमालपुर में रेल कारखाना तथा रेल अधिकारियों का इंजीनियङ्क्षरग  संस्थान होने के वजह से जमालपुर में सुरंग बनाकर के ट्रेन को चलाने का प्रारंभ किया गया था। उस समय 1से 2 ट्रेन ही चलती थी।

 

परंतु धीरे-धीरे भागलपुर जंक्शन पर बदलाव आना प्रारंभ हुए। कोयले के पश्चात डीजल इंजन से ट्रेनें इस रेलखंड पर चलती हुई नजर थी उसके डेढ़ वर्ष पश्चात डीजल इंजन की जगह इलेक्ट्रिक इंजन ने ले ली और साहिबगंज से किया। उल जंक्शन तक डेढ़ किलोमीटर छोड़कर दोहरीकरण का काम पूरा हो चुका है। वर्तमान समय में भागलपुर जंक्शन से अप और डाउन में 44 मेल एक्सप्रेस तथा 50 से अधिक पैसेंजर ट्रेनों का संचालन होता है। यहां से प्लेटफार्म तथा सात रेलवे ट्रैक हैं।

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