आए दिन दहेज को लेकर उत्पीड़न और तलाक के मामले सामने आते रहते हैं। इसलिए वर्तमान समय में लड़कियों की शादी करना आसान काम नहीं रहा। लड़की के जन्म लेते ही माता पिता को उसके पालन पोषण के साथ दहेज की चिन्ता सताने लगती है क्योंकि बिटया को ब्याहाते समय ससुराल वालों के लिए ढेर भर दहेज इकट्ठा करना पड़ता है। और बिटिया को दहेज अगर नहीं दे पाए तो रात दिन माता-पिता इसी चिंता में रहते हैं बिटिया खुश है या नहीं अधिकतर यही देखा गया है शादी के वक्त लड़के वाले लड़की वालों से दावरी (दहेज) की मांग कर बैठते हैं।

 

 

हालांकि कानूनी रूप से यदि देखा जाए तो दहेज प्रथा पर पाबंदी लगाने हेतु दहेज निषेध अधिनियम 1961 के अनुसार दहेज लेने और देने वाले को 5 वर्ष की सजा के साथ-साथ 15000 रू जुर्माना देने का प्रावधान है। और दहेज को लेकर यदि लड़की पर उत्पीड़न किया जाए तो भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के द्वारा पति और रिश्तेदारों को 3 साल की क़ैद के साथ साथ जुर्माने का भी प्रावधान है। और यदि विवाह के बाद लड़की की मौत 7 साल के अंदर हो जाती है और यह साबित हो जाता है कि दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। लड़की को तो भारतीय दंड संहिता की धारा 304 बी के अनुसार लड़की के पति और रिश्तेदारों को कम से कम 7 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास का प्रावधान रखा गया है।

 

 

 

उक्त प्रावधानों के बाद भी लोगों में दहेज की प्रथा का चलन आज भी है हाल ही में केरल सरकार ने दहेज प्रथा पर रोक लगाने के लिए नई पहल की, जिसमें पुरुष कर्मचारी को शादी के बाद एक घोषणा पत्र प्रस्तुत करना पड़ेगा और उसमें बताना होगा उन्होंने दुल्हन के परिवार से दहेज नहीं लिया शादी के बाद यह प्रक्रिया 1 महीने के भीतर विधिवत चलेगी जिसमें कर्मचारी की पत्नी के साथ साथ ससुर को हस्ताक्षर किए जाने की घोषणा की गई है।

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