Tuesday, January 25

IAS success story – सिविल सेवा परीक्षा में सूरज ने दिए थे फिल्मी सवालों के जवाब

IAS success story ,( कुलसूम फात्मा ) आईएएस ऑफिसर बनने की सभी की इच्छा होती है लेकिन जो सही रणनीति और संघर्ष के साथ तैयारी करता है उसी को सफलता हासिल होती है और जब कड़ी मेहनत की बात आती है तो सूरज कुमार राय का भी नाम साथ आता है। जी हां, सूरज ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2017 में 117 वी रैंक प्राप्त की थी। बता दें सूरज यूपी के जौनपुर के मुफ्तीगंज इलाके के पेसारा गांव के रहने वाले हैं सूरज इस परीक्षा में सफलता का श्रेय वह अपने परिवार के सदस्यों को देते हैं, जिनमें से उनके पिता स्वर्गीय महेंद्र राय को खास कर ।

 

 

सूरज ने अपनी शिक्षा इलाहाबाद से कि इन्होंने मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के पश्चात सिविल सेवा परीक्षा से पहले इनका चयन सहायक कमांडेंट के पोस्ट पर हुआ था। लेकिन यह वहां का कार्यभार संभालते के उससे पहले आपकी नियुक्त आईएएस में हो गई । सूरज बताते हैं कि तैयारी करने के समय अपना पूरा फोकस पढ़ाई पर रखें और बीच-बीच में इंटरटेनमेंट के लिए खेल या फिर आपकी जो भी हॉबीज है उसके अनुसार इंजॉय भी करें,और तैयारी के दौरान सही रणनीति का इस्तेमाल करें। अपने हिसाब से टाइम टेबल बनाएं। इंटरव्यू के दौरान बड़ी ही सहानुभूति के साथ प्रश्नों का उत्तर दें, जिन प्रश्नों के उत्तर आपको नहीं पता है, उसके लिए मना कर दे।

 

सूरज कहते हैं मुझे यूपीएससी की प्री परीक्षा 18 जून 2017 के एग्जाम में सफलता मिली। ये मुख्य परीक्षा अक्टूबर की 28 , तारीक 2017 को आयोजित की गई थी और इस परीक्षा के लिए देशभर में रिक्त पदों की संख्या 980 थी। इस एग्जाम के द्वारा इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस इंडियन फॉरेन सर्विस, इंडियन पुलिस सर्विस, और सेंट्रल सर्विसेज जिनमें ग्रुप ए तथा बी पोस्ट पर नियुक्तियां हुई ।

 

सूरज बताते हैं मुझसे इंटरव्यू में कुछ दिलचस्प सवाल पूछे गए थे।

 

  • सवाल यह था आपने आखिरी फिल्म कौन सी देखी थी।
  • उत्तर था – पद्मावत
  • सवाल मूवी कैसी लगी
    जवाब था फिल्म के टेक्निकल पार्ट कॉस्टयूम सेट से डिजाइन विजुअल बहुत ही अच्छे थे और कहानी थोड़ी और कसी हुई हो सकती थी।
  • प्रश्न था फिल्म की कहानी में क्या दिक्कत थी।
  • जवाब था इस फिल्म में इतिहासिक तथ्यों का ख्याल नहीं रखा गया था। यह केवल माली मलिक मोहम्मद जायसी के जरिए लिखित पद्मावती से अलग थी और जब ऐतिहासिक तथ्यों को हिलाया गया तो इन नामों को यूज़ नहीं करना चाहिए था। और नाम दूसरा रखा जा सकता था। ये कहानी सबको पता थी। बस इसे लंबा खींच दिया गया था उत्तर का रुख सकारात्मक करते हुए सूरज ने अंत में यह भी कहा फिल्म में आर्ट एंड डिजाइन के काम काफी खूबसूरत है।

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