शुक्रवार के दिन पटना हाईकोर्ट ने बगैर निबंधन के सड़कों पर चल रही या फिर घूम रही पटना नगर निगम की गाड़ियों के संबंध में निष्पादित करते हुए आदेश दिया, जिसमें कहा के कोई भी ,गवर्नमेंट या फिर अन्य सरकारी निकाय की गाड़ी बगैर निबंधन के सड़क पर  नहीं खड़ी रह सकती हैं जिसके बाबत पटना नगर निगम के मामले में कोर्ट ने इससे हुई लापरवाही पर अपनी नाराजगी जताई। विभाग से 4 महीने के अंदर जिम्मेदार अफसरों पर कार्यवाही पूर्ण रूप से करने का निर्देश भी दिया।

 

असल में बता दें हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता ने इस केस से संबंधित एक जनहित याचिका दाखिल की थी। उसके पश्चात कोर्ट ने अपने आदेश में बड़ी ही तीखी टिप्पणी की, जिसमें कहा देश में कानून से ऊपर कोई भी नहीं है। जब मोटर वाहन कानून में किसी गाड़ी को निबंधन से छूट नहीं दी गई है तो नगर निगम की गाड़ियां 1 दिन भी बगैर निबंधन के कैसे सड़कों पर खड़ी की जा सकती हैं।

 

खंडपीठ ने आदेश में यह भी जाहिर कर दिया के,बिना निबंधन के कोई भी सरकारी या फिर निगम की गाड़ी 1 दिन भी सड़क पर नहीं खड़ी रहेंगी। यदि कोर्ट द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार देखें तो पटना नगर निगम ने 925 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के लिए लगभग 2 करोड़ रुपए जमा किए और महीनों तक राज्य सरकार दो करोड़ रुपए का राजस्व घाटा सहती रही और सन 2019 में तकरीबन 925 गाड़ियां, बगैर निबंधन तथा बीमा के ही घूम रही थी जिसके चलते हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई जिसके बाद 924 गाड़ियों का निबंधन और बीमा सन 2019 के आखिर तक जाकर हुआ।