सोमवार, नवम्बर 29

सौगात : गोरखपुर शहर के बीचोबीच 6 लेन सड़क का शानदार तोहफा, 2 अरब से बदल जायेगा अपना शहर

शहर की पहली सिक्स लेन सड़क नौसढ़ से पैडलेगंज के बीच बनेगी। जेल बाईपास को फोर लेन किया जाएगा तो शहर के दो प्रमुख चौराहों का चौड़ीकरण भी होगा। इन कार्यों का खाका तैयार करने के बाद लोकनिर्माण विभाग ने मंजूरी के लिए शासन में भेज दिया है। लखनऊ और वाराणसी की तरफ आने-जाने वाले वाहनों की भीड़ के चलते नौसढ़ से पैडलेजगंज मार्ग पर आए दिन जाम लगता है। शहर का प्रवेश द्वारा माने जाने वाले नौसढ़ से पैडलेगंज चौराहे तक प्रस्तावित सिक्सलेन सड़क 5.4 किमी लंबी और 32 मीटर होगी। इसके लिए 74.31 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

इसके अलावा 8.5 किमी लंबे जेल बाईपास को भी फोरलेन किया जाएगा। इस पर 154.97 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है। गोलघर काली मंदिर और मोहद्दीपुर चौराहे को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए इसका चौड़ीकरण किया जाएगा। दोनों चौराहों के लिए तीन-तीन करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है। देवरिया रोड पर चौरीचौरा के आगे रेलवे समपार संख्या 145 ई पर बन रहे 646.89 मीटर लंबे फ्लाईओवर के लिए 33.51 करोड़ व सरदार नगर में समपार संख्या 149 ए पर बन रहे 671.25 मीटर लंबे फ्लाईओवर के लिए 28.57 करोड़ रुपये का रीवाइज स्टीमेट शासन को भेजा गया है। दोनों पुलों का निर्माण जुलाई 2018 में शुरू हुआ, उन्हें मार्च 2020 में पूरा होना है।

सड़कों-चौराहों के चौड़ीकरण वाले यह सभी कार्य मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में हैं। शासन से प्रस्ताव स्वीकृत होते ही निर्माण की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी। – एसपी सिंह, मुख्य अभियंता, पीडब्लूडी 14 साल बाद एक बार फिर शहर का कूड़ा निस्तारित होने की उम्मीद जगी है। भटहट ब्लॉक अंतर्गत जंगल डुमरी नंबर दो के बांस स्थान पर जमीन का प्रस्ताव बनने के साथ ही नगर निगम प्रशासन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने की दिशा में सक्रिय हो गया है। वर्ष 2006 में प्लांट के लिए बने प्रस्ताव की फाइल को दोबारा निकाला गया है। तब प्लांट लगाने के लिए मिले 12 करोड़ रुपये में से बचे रुपये की जानकारी ली जा रही है।

शहर का कूड़ा निस्तारित करने की आज तक कोई व्यवस्था ही नहीं बन सकी है। स्थानीय लोगों के विरोध के बीच वर्तमान में कूड़ा एकला बांध पर गिराया जा रहा है। इसके चलते एकला बांध की चौड़ाई भी काफी बढ़ गई है। दो फरवरी को महापौर सीताराम जायसवाल, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर गौरव सिंह सोगरवाल, अपर नगर आयुक्त डीके सिन्हा, चीफ इंजीनियर सुरेश चंद ने बांस स्थान पर सीलिंग की 25 एकड़ जमीन को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने के लिए उपयुक्त पाया था। दो किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्रफल में आबादी भी नहीं है। सब कुछ अ’छा दिखने पर प्रशासन ने जमीन का प्रस्ताव तैयार किया।

नगर निगम ने सबसे पहले महेसरा में कूड़ा निस्तारण की योजना बनाई थी। इस पर काम भी शुरू हो गया था लेकिन नागरिकों ने विरोध शुरू कर दिया था। एकला बांध पर कूड़ा गिराने का नागरिक लगातार विरोध करते हैं। नगर निगम ने गीडा क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण के लिए जमीन देखी। जमीन फाइनल भी कर ली गई लेकिन वहां भी लोगों ने विरोध कर दिया। वर्ष 2006 में जल निगम की संस्था सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विस) को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने के लिए 12 करोड़ रुपये का बजट दिया गया था। योजना को वर्ष 2012 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

इसके तहत शहर के कचरे का समुचित प्रबंधन कर पांच मेगावाट बिजली का उत्पादन करना था। घर-घर जाकर कूड़ा समेटने का काम भी प्लांट लगाने वाली कंपनी को देना था। लेकिन चार साल में जमीन फाइनल हो सकी। नगर निगम प्रशासन ने वर्ष 2010 में महेसरा में 11.567 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत कर निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था जलनिगम को सौंपा। जल निगम ने दिसंबर 2010 से काम शुरू किया। प्लांट स्थल पर बाउंड्री, वर्कर रेस्ट रूम, इलेक्ट्रिकल पैनल और प्रशासनिक भवन का कुछ काम हुआ था, लेकिन बारिश होते ही काम ठप हो गया। गड्ढे में जमीन होने के कारण महीनों जलभराव रहा।

फिर जमीन किनारे पांच फीट ऊंचा बांध बनाने और डिजाइन में बदलाव का प्रस्ताव बना लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी। कार्यदायी संस्था ने वर्ष 2012 के जून माह में निर्माण कार्य पूरी तरह ठप कर दिया। बांस स्थान की जमीन अब नगर निगम की हो गई है। यह जानकारी महापौर सीताराम जायसवाल ने दी। उन्होंने कहा कि कमिश्नर जयंत नार्लिकर और डीएम के. विजयेंद्र पाण्डियन के विशेष प्रयासों से कूड़ा निस्तारण का रास्ता साफ हुआ है। जंगल डुमरी नंबर दो के बांस स्थान पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने के लिए जमीन फाइनल की गई है। सीएंडडीएस को पहले ही 12 करोड़ रुपये दिए गए थे। इन रुपयों में से निर्माण पर कुछ खर्च हुआ था। बाकी रुपये बचे हैं। प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन की योजना बन रही है। प्लांट लगाने वाली एजेंसी ही डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन भी करेगी। – अंजनी कुमार सिंह, नगर आयुक्त।

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