आज के इस पॉजिटिव स्टोरी में हम आपको बताने जा रहे हैं बिहार के एक ऐसे आईपीएस ऑफिसर की कहानी जिनकी वजह से अपराधियों गुंडो माफियाओं में हड़कंप मचा रहता है। हम बात कर रहे हैं आईपीएस ऑफिसर शिवदीप लांडे की जिनका जन्म महाराष्ट्र के अकोला जिले के परसा गांव में हुआ, इनके माता पिता बहुत अधिक शिक्षित नहीं थे, वह खेती किया करते थे।

शिवदीप लांडे ने बहुत ही कठिन परिस्थितियों में अपनी उच्च शिक्षा पूरी की, इसके बाद वे महाराष्ट्र के श्री संत गजानन महाराज इंजरिंग कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की उसके बादवे संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी में जुट गए, भारतीय राजस्व विभाग में नौकरी करने के दौरान ही इनका चयन संघ लोक सेवा आयोग में हो गया। इसके बाद शिवदीप लांडे की पहली नियुक्ति बिहार केमुंगेर जिले में हुई, जो कि उस वक्त वहां का जमालपुर क्षेत्र पूरी तरह से नक्सल प्रभावित था।

 

इसके बाद उनका तबादला पटना जिले में किया गया जहां पर शिवदीप लांडे ने मनचलों को ज़बरदस्त सबक सिखाया। इनके कार्यकाल के दौरान लड़कियों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ लड़कियां अपने आप को सुरक्षित महसूस करने लगी। शिवदीप लांडे का मोबाइल नंबर हर लड़कि के मोबाइल में दर्ज था। महज एक फोन या एसएमएस के बाद तुरंत कार्यवाही की जाती थी। लेकिन उसके तुरंत बाद पटना से इनका तबादला कर दिया गया इस तबादले का भी पुरजोर विरोध किया गया था।

 

इसके लिए कैंडल मार्च भी निकाला गयाजिसका कोई फायदा नहीं हुआ। अब शिवदीप लांडेपूरे देश में प्रसिद्ध हो चुके हैं। बिहार के रोहतास जिले में भी शिवदीप लांडे ने अपनी सेवा दी है। जहां पर उन्होंने खुद फिल्मी अंदाज में जेसीबी चलाकर अवैध स्टोन क्रेशरो को कुचलना शुरू कर दिया था। जिसको देखकर वहां के खनन माफियाओं की नींद उड़ गई। इसके तुरंत बाद वहां से भी शिवदीप लांडे का तबादला कर दिया गया।

 

अपने कार्यकाल के दौरान वे भेष बदल कर हालचाल लेने निकल पड़ते थे। इन्होंने कई छापेमारीयां अपनी भेष बदल कर की है जो पूरे देश को पता है। अभी फिलहाल ये केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर महाराष्ट्र पुलिस में डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस- एंटी नारकोटिक्स सेल क्राइम ब्रांच मुंबई के रूप मुंबई में अपनी सेवा दे रहे हैं।

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