बुधवार, दिसम्बर 8

भारत में बसों के परिचालन को मिली मंजूरी, केंद्र सरकार ने जारी किया आवाजाही का गाइडलाइन

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश के अलग-अलग जगहों पर फंसे प्रवासी मजदूरों, पर्यटकों, विद्यार्थियों आदि की आवाजाही की अनुमति दे दी है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अपने यहां फंसे लोगों को उनके गृह राज्यों में भेजने और दूसरी जगहों से अपने-अपना नागरिकों को लाने के लिए एक मानक प्रॉटोकॉल तैयार करें। यानी, अब हर प्रदेश दूसरे प्रदेशों में अपने नागरिकों को वापस ला पाएगा और अपने यहां फंसे दूसरे प्रदेशों के नागरिकों को वहां भेज पाएगा।

गृह मंत्रालय की ओर से जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार ये लोग कुछ शर्तों के साथ अब अपने घर जा सकेंगे। इसके लिए राज्‍य सरकारें उनकी बसों की व्‍यवस्‍था कराएंगी। गृह मंत्रालय ने बुधवार को गाइडलाइंस जारी करते हुए राज्‍यों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने यहां लोगों को वापस बुलाने और उन्‍हें भेजने के लिए नोडल प्राधिकरण और नियम बनाएं। यह नोडल प्राधिकरण अपने राज्‍यों में फंसे लोगों का पंजीकरण भी करेंगी।

गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइंस के मुताबिक अगर किसी राज्‍य में फंसा कोई व्‍यक्ति दूसरे राज्‍य में जाना चाह रहा है तो इसके लिए दोनों राज्‍यों की सरकारें आपस में बातचीत करके उपयुक्‍त कदम उठाएं। लोगों को सड़क के रास्‍ते ले जाया जाए। लोगों को भेजने से पहले सभी की मेडिकल जांच (स्‍क्रीनिंग) की जाए। अगर कोरोना वायरस संक्रमण का कोई लक्षण नहीं पाया जाए तो उन्‍हें जाने की अनुमति दी जाए।

गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस के अनुसार फंसे लोगों को भेजने के लिए बसों की व्‍यवस्‍था की जाए। इन बसों को अच्‍छी तरह से सैनिटाइज किया जाए। साथ ही इसमें बैठने के दौरान शारीरिक दूरी के नियम अपनाए जाएं।लोगों के उनके गंतव्‍य स्‍थान पहुंचने पर सबसे पहले स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की टीम को उनकी जांच करनी होगी। इसके बाद उन्‍हें घरों में पृथक रहना होगा। हालात के अनुसार अगर जरूरत हो तो उन्‍हें क्‍वारंटाइन सेंटर में भी रखा जा सकता है। इन सभी लोगों की समय-समय पर मेडिकल जांच की जाएगी। इसके लिए लोगों को आरोग्‍य सेतू एप भी यूज करने के लिए प्रोत्‍साहित किया जाएगा। ताकि उनकी स्थिति के बारे में जानकारी मिलती रहे।