केंद्र सरकार ने मकान मालिक और किरायेदारों के लिए नए एक्ट को मंजूरी दे दी है। इस नए एक्ट में मकान किराए पर देना और लेना इस दौरान मकान मालिक और किराएदार दोनों के लिए ही नए नियम बनाए गए हैं। मकान मालिक को किरायेदारों के द्वारा कितना एडवांस किराया लिया जाना है, औपचारिक रेंट एग्रीमेंट कैसे बनना है, और रेंट एग्रीमेंट खत्म होने पर क्या होगा।

 

 

इन सभी सवालों के जवाब इस नए एक्ट में शामिल है। इस नए नियम को लागू होने से कोई भी मकान मालिक मनमानी तरीके से किरायेदारों पर किसी भी प्रकार का शर्त नहीं थोप सकेंगे। इस नए एक्ट का नाम मॉडल टेनेंसी रखा गया है।

 

 

मॉडल टेनेंसी कानून के तहत दस बड़ी बातों का उल्लेख निम्न प्रकार से है। सबसे पहले एग्रीमेंट मकान को किराए पर देने के लिए लिखित रेंट एग्रीमेंट अनिवार्य होगा इसमें किसी भी प्रकार से मौखिक समझौता मान्य नहीं होगा। दूसरा सिक्योरिटी डिपॉजिट यानी एडवांस, मकान मालिक किसी भी किराएदार से अधिक से अधिक 2 महीने का किराया एडवांस ले सकते हैं।

 

 

तीसरा सरते और नियम मकान मालिक मनमाने ढंग से किरायेदारों पर शर्ते नहीं थोप सकेंगे। चौथा है किराए में बढ़ोतरी अगर मकान मालिक को मकान के किराए में बढ़ोतरी करनी है तो किराएदार को 3 महीना पहले नोटिस देना अनिवार्य होगा। पांचवा मरम्मत कार्य मरम्मत कार्य में खर्च हुए पैसे का स्पष्टीकरण पहले ही तय किया जाएगा।

 

 

इस नए कानून के दायरे में शहर के साथ-साथ गांव भी शामिल है यह नया नियम गांव में भी संपूर्ण तरीके से लागू रहेगा, इसके अलावा होटल लॉज इंडस्ट्रियल रेंट प्रॉपर्टी इस नए नियम में शामिल नहीं रहेंगे। उल्लंघन एग्रीमेंट का उल्लंघन करने पर अथवा एग्रीमेंट के अनुसार एग्रीमेंट के खत्म होने के बाद मकान खाली नहीं करने पर 2 महीने तक दोगुना और उसके बाद 4 गुना किराया किराएदार से वसूला जाएगा।

 

 

आखिरी बिंदु यह है कि किराएदार मकान किराए पर लेकर किसी दूसरे को किराए पर अगर देते हैं या फिर मकान में किसी भी प्रकार के बदलाव करते हैं तो उससे पहले मकान मालिक की सहमति लेनी अनिवार्य होगी। आइए जानते हैं इस नए एक्ट से किरायेदारों के लिए क्या फायदा मिलेगा इस नए कानून से मकान मालिकों की मनमानी और फ़जुल के शर्तों से आजादी मिलेगी।

 

 

मकान मालिक किसी भी समय मनमाने ढंग से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे सिक्योरिटी डिपॉजिट यानी एडवांस का पैसा 2 महीने के किराए से अधिक नहीं होगा मरम्मत के खर्च की जिम्मेवारी किसकी होगी यह रेंट एग्रीमेंट में स्पष्ट रुप से लिखा जा चुका होगा। वहीं दूसरी ओर मकान मालिकों के लिए इस एक्ट में जो फायदे मिलने वाले हैं बस कुछ इस प्रकार से हैं, किराएदार मकान पर किसी भी स्थिति में कब्जा नहीं कर सकेगा।

 

 

किराएदार से अगर कोई विवाद होता है तो भी किराया उन्हें मिलता रहेगा, एग्रीमेंट के अनुसार अगर किराएदार ने मकान खाली नहीं किया तो दोगुना किराया मकान मालिक को मिलेगा। मार्केट रेट के अनुसार मकान मालिक किराया तय कर सकेंगे। किसी भी मकान मालिक या किराएदार के किसी भी प्रकार की समस्या के निष्पादन के लिए रेंट अथॉरिटी बनाई गई है अगर किसी भी मकान मालिक किराएदार को किसी भी प्रकार की शिकायत होगी तो वह अपनी शिकायत रेंट अथॉरिटी में सबमिट करेंगे 60 दिनों के भीतर किराए पर विवाद का निपटारा अथॉरिटी द्वारा किया जाएगा।

 

 

 

मकान खाली करने के बाद मकान मालिक अगर एडवांस डिपॉजिट रिफंड नहीं कर पाया तो किराएदार को सामान्य ब्याज दर से उस राशि पर ब्याज मिलेगा। मकान मालिक या प्रॉपर्टी मैनेजर किसी भी प्रकार से बिजली पानी जैसी सेवाएं किराएदार के लिए बंद नहीं कर सकते हैं अगर ऐसा करना हो तो किराएदार को 24 घंटा पहले सूचित करना अनिवार्य होगा। सबसे अहम बात यह है कि एग्रीमेंट के अवधि में किराएदार को एग्रीमेंट खत्म होने से पहले निकाला नहीं जा सकेगा, यह सिर्फ एक दूसरे की रजामंदी से संभव हो सकेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published.