सरकार द्वारा पूरे भारत में ज्यादातर कामों को डिजिटलाइस्ड करने की मुहिम चलाई जा रही है। जिसमें ज्यादातर काम तो डिजिटल प्रोसेस द्वारा देश में होने भी लगे हैं । इसी कड़ी में निर्वाचन आयोग द्वारा एक और पहल की गई है, जिसके तहत मतदाता सूची से लेकर चुनावी प्रक्रिया को डिजिटलाइस्ड करने की योजना बनाई गई है।

 

बताया जा रहा है कि इस नई व्यवस्था की वजह से मतदाता सूची में गड़बड़ी के साथ फर्जी तरीके से वोटर आईडी कार्ड बनाने पर भी नियंत्रण रखा जा सकेगा । निर्वाचन आयोग के इस नई योजना के तहत सभी विधानसभा क्षेत्रों और उसके मतदान केंद्रों की जिओ मैपिंग व मतदाता के घरों की भी जियो टैगिंग की जाएगी। जानकारी के अनुसार अभी इस योजना की शुरुआत औरंगाबाद जिले से की गई है।

 

# किस तरह निर्धारित होगी बूथो की सीमा___

सूत्रों से मिली खबर के अनुसार राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एच आर  श्रीनिवास द्वारा विधानसभा क्षेत्रों समेत प्रत्येक बूथो की जियो फेंसिंग के निर्देश जारी किए गए हैं  ।जिसके बाद सभी बूथों की सीमा तकनीकी रूप से निर्धारित हो जाएगी। वर्तमान में यह योजना औरंगाबाद से शुरू की गई है, जिसे आगे सभी जिलों में शुरू करने की कवायद की जाएगी । आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जियो फेंसिंग के बाद हर बूथ की सीमा के अंदर आने वाले सभी हाउसहोल्ड की जियो टैगिंग कर उसे हाउस नंबर से जोड़ दिया जाएगा, जिससे यह तय हो सकेगा कि संबंधित घरों में कितने वोटर मौजूद हैं।

 

# हाउस संख्या के साथ हुई गड़बड़ी को सुधारा जाएगा।

उप निर्वाचन पदाधिकारी संजय कुमार से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था के कारण घरों की जियो टैगिंग से परिवार के सभी सदस्यों का हाउस नंबर सेम ही होगा । पुराने तरीके से मतदाता सूची के पुनरीक्षण के कारण एक ही परिवार के सदस्यों का हाउस नंबर अलग अलग हो गया था, इस नई योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पिछली बार हुई गलती को सुधारा जा सकेगा एवं जियोटैगिंग के कारण एक परिवार के सभी मतदाताओं के एक साथ आ जाने से उनके सत्यापन में भी काफी आसानी होगी।

इतना ही नहीं इसके अलावा निकाय या पंचायत के चुनावों के मतदाता सूची तैयार करने में भी इसका फायदा नजर आएगा । जियो टैगिंग के द्वारा सभी घरों के जुड़े होने से वार्ड गठन के विवादों में भी कमी आने की संभावना है। बताया जा रहा है कि तकनीकी रूप से घरों को अलग भी कर दिया जाएगा।

 

# नहीं जुड़ पाएंगे बाहरी मतदाता__

निकाय और पंचायत चुनाव के दौरान फर्जी तरीके से वोटरों के नाम जोड़े जाते हैं। जिओ टैगिंग के बाद दूसरे जिले, पंचायत या वार्ड के वोटरों को फर्जी तरीके से जोड़ पाना कठिन हो जाएगा। एक परिवार के नहीं होने से बाहरी वोटर आसानी से पकड़ में आ जाएंगे। उप निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार भविष्य में मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने में यह महत्वपूर्ण साबित होगा।

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