बुधवार, दिसम्बर 8

भागलपुर निवासी डॉ. प्रभात ने किया बेहतरीन अविष्कार, चेन्नई में हैं वैज्ञानिक शहर का सीना हुआ चौड़ा

डॉ. प्रभात मूलरूप से तातारपुर इलाके के सराय, सोनबर्षा लेन के रहने वाले हैं। इनके पिता शैलेंद्र मंडल बिहार पुलिस में थे, जबकि मां गुना देवी गृहिणी हैं। सेंट जोसेफ स्कूल नाथनगर से 2002 में दसवीं और टीएनबी कॉलेज इंटर पास करने के बाद प्रभात ने हल्दिया इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी कोलकाता से सिविल में बीटेक किया। 2017 में सीएसआइआर से पीएचडी की उपाधि ली। उनका विषय अल्ट्रा हाईपरफॉरमेंस कंक्रीट था। 2012 से ही वे सीएसआइआर में विज्ञानी हैं।

डॉ. प्रभात रंजन इंजीनयरिंग साइंस में 2019 का सीएसआइआर युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से भी नवाजे गए थे। उन्हें यह पुरस्कार अल्ट्रा हाईपरफॉरमेंस कंक्रीट पर प्रायोगिक और सैद्धांतिक अनुसंधान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मिला था। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हर्ष वर्धन ने उन्हें पुरस्कार सौंपा था। इंडियन कंक्रीट इंस्टीच्यूट की ओर से डॉ. प्रभात को 2019 में बेस्ट पीएचडी थिसिस के लिए पुरस्कृत किया गया। अपने प्रोजेक्ट शोध के सिलसिले में वे कार्डिफ विवि यूनाइटेड किंगडम भी गए थे।

डॉ. प्रभात ने बताया कि अल्ट्रा हाईपरफार्मेंस कंक्रीट बड़े पुल-पुलिया, भवन, चिमनी, ओवरब्रिज, एयरपोर्ट, टर्मिनल आदि बनाने के काम आएगा। सामान्य भवनों के कंक्रीट की क्षमता करीब 30 एमपीए (मेगा पास्कल यूनिट) होती है, जबकि इस तरह निर्माण में 140 से 220 एमपीए क्षमता वाले संरचना का निर्माण हो सकता है। ये संरचनाएं भूकंपरोध होंगी। हालांकि इस तरह के निर्माण में ज्यादा खर्च आएगा। किंतु सौ साल तक भी इसमें मरम्मत की जरूरी नहीं है।

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