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एक तरफ जहां हमारा भारत देश प्रतिदिन प्रगति कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ आज भी हमारे यहां कुछ कुरीतियां ऐसी है जो अंदर ही अंदर हमारे देश की नींव को खोखला बना रही हैं । दुख की बात तो यह है कि ना तो इन्हें कोई रोक पा रहा है और ना ही इन पर कोई सख्त कार्रवाई की जा रही है। ऐसी ही कुछ कुरीतियां है, बाल विवाह एवं दहेज प्रथा। खबर मिली है कि बिहार सरकार के बाल विवाह एवं दहेज प्रथा विरोधी अभियान में अब पंचायती राज विभाग को भी शामिल कर लिया गया है। बिहार सरकार की नई योजना के बारे में पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी से मिली जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ पंचायतों में एक अभियान चलाया जाएगा,

 

जिसके तहत पंचायती राज की विभिन्न धाराओं के मुताबिक बाल विवाह को रोकने में असमर्थ मुखिया को पद से निरस्त किया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ बाल विवाह रोकने वाले मुखिया एवं अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों को सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाया जाएगा। गुरुवार को इसी संदर्भ में जिला अधिकारियों जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारियों एवं जिला पंचायत पदाधिकारियों को पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव मिहिर कुमार सिंह ने पत्र भी लिखा । सम्राट चौधरी ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बाल विवाह एवं दहेज प्रथा जैसी समाज की कुप्रथाओं के खिलाफ एक अभियान चला रहे हैं, पंचायती राज विभाग का अभियान इसी का एक हिस्सा है।

 

पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने बातचीत में बताया कि ग्राम सभा एवं वार्ड सभा की जो बैठक होगी, उनमें जिन महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी, उनमें बाल विवाह एवं दहेज उन्मूलन जैसे विषय अनिवार्य रूप से शामिल होंगे। इतना ही नहीं बैठक में बाल विवाह एवं दहेज से होने वाले दुष्प्रभाव पर भी चर्चा की जाएगी । जिससे की आम जनता इस विषय के प्रति संवेदनशील रहे। योजना के अनुसार पंचायत समिति एवं जिला परिषद की सामान्य बैठकों में भी इन विषयों पर चर्चा की जाएगी अभियान की सफलता के लिए रणनीति बनाने का कार्य भी किया जाएगा ।

 

इतना ही नहीं इसके अलावा ग्राम पंचायत समिति एवं जिला परिषद की सामाजिक न्याय समिति भी बाल विवाह एवं दहेज प्रथा पर अपनी बैठकों में चर्चा करेंगे। बताया जा रहा है कि जैसे ही विवाह की सूचना वार्ड सदस्य एवं मुखिया को मिलेगी, बाल विवाह से संबंधित परिवारों के अभिभावकों को बाल विवाह रोकने के लिए समझाया जाएगा। राजी ना होने पर स्थानीय थाना एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी एवं अनुमंडल पदाधिकारी को तुरंत सूचित किया जाएगा, जो कि विवाह रोकने में वार्ड सदस्यों व मुखिया की मदद करेंगे । साथ ही जिलाधिकारी भी इस मामले मेें दखल देंगे।

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