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बिहार सरकार अपने किसानों के विकास के लिए समय-समय पर नई योजना बनाती रहती है। इसी कड़ी में बिहार सरकार ने किसानों के लिए एक और नई योजना बनाई है, जिससे ना केवल किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी होगी, बल्कि कई फायदे भी होंगे। बिहार सरकार ने इस बार अपने किसानों को सेब की खेती करने के लिए अनुदान देने का फैसला लिया है। जिससे दो फायदे होंगे, पहला यह कि बिहार सरकार किसानों को सेब की खेती के लिए प्रोत्साहित कर सकेगी एवं दूसरी तरफ सेव की खेती से किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। वर्तमान स्थिति की बात करें तो अब तक पूरे भारत में सेब की खेती सिर्फ हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में ही होती थी, लेकिन अब बिहार में भी शुरू कर दी गई है।

 

# बिहार में भी हो सकती है सेव की खेती ।

आज तक हमने बस जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में ही सेबो को उगते देखा था, लेकिन अब यह नजारा बिहार में भी देखने को मिलेगा। सामान्य तौर पर सोचे तो बिहार की मिट्टी हिमाचल और जम्मू कश्मीर से काफी अलग है। लेकिन विशेषज्ञों से मिली जानकारी के अनुसार “हरीमन-99” सेव की एक ऐसी वैरायटी है जो बिहार जैसे जगहों पर भी उगाई जा सकती है। कृषि विभाग ने तो सेव की खेती को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 7 जिलों में सेब की खेती की योजना पर काम भी शुरू कर दिया है। जिन 7 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा, उनमें बेगूसराय, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद, वैशाली, कटिहार और समस्तीपुर के नाम शामिल है। यहां तक कि इन जिलों के किसानों ने तो अपने स्तर से सेब की खेती भी शुरू कर दी है।

 

# बिहार की मिट्टी “हरीमन-99” वैरायटी के लिए उपयुक्त__

हरीमन-99 वेरायटी की सेब बिहार के मिट्टी में भी उगाया जा सकता है ।चाहे वह जमीन पथरीली,दोमट या फिर लाल ही क्यों न हो । पौधों का विकास भी अच्छी तरह से हो रहा है । ऐसा माना जा रहा है की बिहार में पैदा होने वाले सेब उसी टेस्ट,कलर और साइज का होगा, जैसा हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में होता है । सेब की खेती की लागत इकाई प्रति हेक्टेयर 2 लाख 46 हजार 250 रुपए हैं । जो किसान इस खेती को करने के लिए इच्छुक हैं उन किसानों को कृषि विज्ञान केंद्रों पर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ।

 

# क्या है पौधे लगाने का सही समय__

सेब की खेती के लिए नवंबर से फरवरी तक पौधे लगाने का सही समय होता है । हरिमन 99, एना, डोरसेट गोल्डन, माइकल और ट्रिपिकल स्वीट्स जैसी वेराइटी के लिए 40 से 50 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान सही होता है । सेब के पौधे लगाने के 2 साल बाद फूल आते हैं । दिसंबर और जनवरी में फूल लगते हैं और मई व जून में फल तैयार हो जाते हैं । बता दें की सेब का क्षेत्र विस्तार करने के लिए सरकार किसानों को प्रति हेक्टेयर पर ढाई लाख रुपये तीन किस्तों में देगी । पहली किस्त में अनुदान का 60 फीसदी मिलेगा, और बचा हुआ अनुदान दो समान किस्तों में दिया जाएगा ।

 

# मैदानी क्षेत्र के लिए हरिमन-99 को किया गया है विकसित ___

डॉ राजेंद्र प्रसाद कृषि विवि, पूसा के निदेशक के अनुसार सेब की उन्नत खेती सामान्यत: ठंडे राज्यों में होती है । मैदानी क्षेत्र के लिए हरिमन-99 प्रजाति को विकसित की गई है । सेब की खेती के लिए किसानों को बिहार सरकार के वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन करना होगा । इससे संबंधित विशेष जानकारी जिला के सहायक निदेशक उद्यान से लिया जा सकता है । सेब की खेती लिए जिन किसानों को चुना जाएगा, उन्हें वैशाली के देसरी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ट्रेनिंग दी जाएगी । किसानों को हिमाचल प्रदेश से हरिमन 99 वेराइटी का पौधा दिलाया जाएगा । शिक्षण सहित एक पौधे की लागत लगभग 200 रुपए होंगे ।

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