बिहार में अपराध का एक मुख्य कारण जमीनी विवाद शामिल है, इससे निपटने के लिए बिहार सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री तथा दाखिल खारिज के नियमों में बदलाव किया है। जमीन रजिस्ट्री से जुड़े मामलों को निपटाने के लिए बिहार सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

 

इसके लिए जमीन रजिस्ट्री दाखिल खारिज और भू राजस्व संग्रहण के तरीके में भी बदलाव किया जा रहा है बिहार के अलग-अलग निबंधन कार्यालयों में 127000 से अधिक दस्तावेज जो कि लंबित पड़े हुए हैं यह ऐसे दस्तावेज हैं जिसके मालिक जमीन रजिस्ट्री की मूल कॉपी लेने के लिए निबंधन कार्यालय नहीं आए।

 

इनके निष्पादन के लिए मध निषेध उत्पाद और निबंधन विभाग को जोड़ा गया है, इसके आयुक्त ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि जितने भी दस्तावेज हैं उनके संबंधित पक्षकारों को बुलाकर नियम के अनुसार 15 जनवरी तक दस्तावेजों को नष्ट करने का निर्देश दिया गया है।

 

जानकारी के अनुसार बिहार में सभी निबंधित दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन भी किया जा रहा है, इसमें सबसे पहले वर्ष 1950 से 1995 तक के दस्तावेज अब मात्र एक क्लिक पर निबंधन कार्यालयों से मिल सकेगा, डिजिटाइजेशन हो जाने से मेरे को तो सुरक्षित रहेंगे ही साथ साथ आम लोगों को मेरे कार्ड के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

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