बुधवार, दिसम्बर 8

बिहार में चीनी मिल ने 600 कामगारों को निकाला, किसानो का 112 करोड़ बकाया अब लटका ताला

बिहार के सीतामढ़ी के रीगा चीनी मिल (Riga Sugar Mill) ने अपने 600 कर्मियों (Six Hundred Staff) को बाहर (Sacked from Job) ) का रास्ता दिखला दिया है. रीगा मिल प्रशासन ने इस बारे में नोटिस जारी कर दिया है. रीगा चीनी मिल प्रशासन ने एक नोटिस जारी किया है, जिसमें अगले दो महीने के लिए अपने कर्मियों से काम न लेने की बात कही गई है. ‘काम नहीं तो पैसा नहीं’ के आधार पर रीगा चीनी मिल ने यह नोटिस जारी किया है. नोटिस में यह भी बताया गया है कि दो महीने की इस अवधि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

चीनी मिल का दावा- लंबे समय से घाटे में चल रही मिल

रीगा चीनी मिल द्वारा जारी इस नोटिस के बाद कर्मचारियों मे संशय की स्थिति बनी हुई है. रीगा चीनी मिल काफी लंबे अरसे से घाटे में चलने का दावा कर रही है. ऐसे में लॉक डाउन की इस कठिन परिस्थिति में प्रशासन अगर मिल के संचालन में अपनी रजामंदी नहीं दिखलाएगा तो उसके 600 कर्मियो की स्थिति क्या होगी, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है. हालांकि

 

रीगा मिल के गेट पर लटका ताला

सीतामढ़ी की रीगा चीनी मिल प्रशासन द्वारा इस नोटिस को जारी करने के बाद चीनी मील के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया गया है. चीनी मिल के अधिकारियो के मोबाईल भी स्वीच ऑफ आ रहे हैं. रीगा चीनी मिल के इस फैसले के बाद सीतामढ़ी प्रशासन भी इस मामले में कोई रूचि नहीं ले रहा है. चीनी मिल के गेट पर चिपकाये गये नोटिस के बाद सीतामढ़ी के रीगा चीनी मिल में काम करने वाले कर्मी बहुत परेशान हैं. इस नोटिस के बाद से तकरीबन 600 कर्मी रातोंरात सड़क पर आ गये हैं. गौरतलब है कि सीतामढ़ी के रीगा चीनी मिल पर सीतामढ़ी के गन्ना उत्पादक किसानों का भी तकरीबन 112 करोड़ रुपया बकाया है जिसका भुगतान नहीं होने से तकरीबन 50 हजार किसानों की आर्थिक हालत बहुत खराब है.

मिल मालिक ने ​सरकार से मांगा था लोन

रीगा चीनी मिल कुछ समय पहले तक राज्य सरकार से मदद की गुहार लगा रहा था. चीनी मिल प्रशासन का कहना था कि यदि सरकार मिल को अगर सॉफ्ट लोन के तहत 40 करोड़ रुपए उपलब्ध करा देती है तो वे अपने किसान और कर्मियों को भुगतान कर सकते हैं. किंतु राज्य सरकार ने चीनी मिल की इस अपील पर ध्यान नही दिया. गौरतलब है कि सीतामढ़ी और उसके आसपास के इलाकों में उद्योग धंधों के नाम पर सिर्फ रीगा चीनी मील ही है, जिससे तकरीबन 50 हजार किसानो की रोजीरोटी जुड़ी हुई है और 600 से ज्यादा लोग इस चीनी मील मे काम कर रहे हैं.

चीनी मील के वर्करों की गुहार

रीगा चीनी मिल वकर्स यूनियन के महामंत्री मनोज कुमार का कहना है कि हम लोगों ने शनिवार तक काम किया है. दो महीने काम से हटाने या फिर दूसरे किसी फैसले की जानकारी ना तो कर्मियों को दी गई और ना ही यूनियन को कोई सूचित किया गया. जब वे लोग मिल पर आए तो इस नोटिस को चीनी मिल के गेट पर पहुंचे तो नोटिस चिपका हुआ पाया. मिल में काम करनेवाले रामपंत किंकर का कहना है कि उन्हें अपना भविष्य अंधकारमय दिख रहा है. मिल प्रशासन पर अब उनको भरोसा नहीं रहा. चीनी मिल के भविष्य में ना खुलने की बात से हर ओर दुविधा की स्थिति है. चीनी मिल द्वारा अप्रैल माह का वेतन भी अब तक नही दिया गया है.

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