बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ज़मीन सम्बन्धी नियमो में बदलाव करते हुए यह निर्देश जारी किया है की अगर ग़ैर-मजरुआ आम, ख़ास, कैसरे हिंद, ख़ास महाल, सरकारी विभागों के स्वामित्व वाली ज़मीन के अलावा सार्वजनिक जल निकायो के ज़मीनो पर जिस किसी ने भी क़ब्ज़ा किया है उसे त्वरित कार्यवाही करते हुए मुक्त कराया जाए।

 

वर्ष 2012 से पहले इन ज़मीनो पर अतिक्रमण करने वालो के लिए सिर्फ़ जुर्माना का प्रावधान था, लेकिन 2012 के बाद इसे बदलकर एक वर्ष के कारावास की सजा में तब्दील कर दिया गया। लेकिन अब ताज़ा निर्देश के अनुसार अब अतिक्रमण करने वाले को सीधा जेल भेजने का आदेश जारी किया गया है। यह आदेश ख़ासकर उन लोगों के लिए है जिन्होंने अतिक्रमणमुक्त ज़मीन पर दुबारा क़ब्ज़ा कर लिया है।

 

 

सभी ज़िला के अधिकारियों को यह पत्र लिखा गया है की जल्द से जल्द सभी प्रकार के लोकभूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, अगर नही मान रहे तो दंड को प्रवधानो के अनुसार उपयोज की जाए। विभाग द्वारा यह आदेश इस प्रकार के ज़मीनो के लिए जारी हुआ जो ग़ैर-मजरुआ आम, ख़ास, कैसरे हिंद, ख़ास महाल, सरकारी विभागों के स्वामित्व वाली ज़मीन के अलावा सार्वजनिक जल निकायो के ज़मीन पर अवैध क़ब्ज़ा हुआ है।

 

 

अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने प्रमंडलीय आयुक्तों एवं जिलाधिकारियों को पत्र लिख कर कहा है कि हर तरह के लोकभूमि को अतिक्रमण मुक्त कराएं। इसके लिए बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम में संशोधन के तहत किए गए दंड के प्रविधानों का उपयोग करें। विभाग का यह आदेश गैर-मजरूआ आम, खास, कैसरे हिन्द, खास महाल, सरकारी विभागों के स्वामित्व वाली जमीन के अलावा सार्वजनिक जल निकायों को अतिक्रमण मुक्त किए जाने के संदर्भ में है।

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