बिहार में जल्द ही मंदिरों एवं मठों के जमीन के मालिकाना हक के लिए बड़ा फैसला होने वाला है। जिसके बाद मंदिरों एवं मठों के ज़मीन का मालिकाना हक प्रबंधक संस्थापक अथवा पुजारी से छिन जाएगा। राजस्व विभाग इन जमीनों के लिए नए विकल्प तलाश रहा है। जिससे जमीन की अवैध खरीद बिक्री रुके तथा विवाद समाप्त हो सके।

 

 

बिहार में मौजूद सैकड़ों हेक्टेयर जमीन जोकि मठ मंदिर मे मौजूद है, इसका सर्वे किया जा रहा है, विधि मंत्री प्रमोद कुमार के अनुसार राजस्व विभाग में मौजूद मंदिरों एवं मठों के जमीन को अब उस मंदिर के पुजारी अथवा महंत के नाम के बदले इष्ट देव के नाम पर दर्ज होने वाला है। विधि मंत्री के अनुसार यह आदेश सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया है जिसका अब पालन किया जा रहा है।

 

मिली जानकारी के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय ने मंदिर से संबंधित जमीन विवाद मे कहा था कि, मंदिर में विराजमान देवता ही उस मठिया या मंदिर के जमीन का मालिक होता है। इस वजह से बिहार के सभी मंदिर एवं मठों के जमीन को इष्ट देव के नाम पर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। न्यायालय ने आदेश में साफ साफ कहा है कि किसी भी कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है की राजस्व के रिकॉर्ड में मंदिर के पुजारी या प्रबंधक का नाम दर्ज किया जाए।

 

बैठक में यह तय किया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन किया जाएगा साथ साथ इस बैठक में विधि विभाग को ऐसे जमीनों के आंकड़े जुटाने के आदेश दिए गए हैं। इस नई व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगी कि अब मंदिर एवं मठों के जमीन का अवैध तरीके से खरीद तथा बिक्री संभव नहीं हो सकेगा तथा इस पर पूर्ण तरीक़े से रोक लग जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार बिहार के कई मंदिर एवं मतों के पुजारी मंदिर में मौजूद जमीन की अवैध तरीके से बिक्री करते हुए पाए गए हैं जिसको देखते हुए सरकार ने यह फैसला लेना जरूरी समझा है।

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