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भारत में केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे एक बेहद ही महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट जिसका नाम सिलीगुड़ी गोरखपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, यह एक्सप्रेसवे भारत के 3 राज्यों को आपस में जोड़ने का कार्य करेगा जिसमें उत्तर प्रदेश बिहार पश्चिम बंगाल राज्यों का नाम शामिल है, इस प्रोजेक्ट को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर तक विस्तार किया जाना है। आइए जानते हैं सिलीगुड़ी तथा गोरखपुर के बीच पड़ने वाले जिलों के बारे में,

 

मिली जानकारी के अनुसार एक्सप्रेस वे की पूरी लंबाई लगभग 519 किलोमीटर बताई गई है जिसमें आठ लेन सड़क के 760 संपूर्णता ग्रीन फील्ड होगा, यह एक्सप्रेसवे बिहार के कई जिलों से होते हुए गुजरेगा, जिसमें मुख्य था गोपालगंज पूर्वी चंपारण पश्चिमी चंपारण शिवहर सीतामढ़ी मधुबनी सुपौल अररिया किशनगंज सहरसा मधेपुरा इत्यादि जिलों से इस एक्सप्रेस-वे को गुजारने का प्लान बनाया गया है।

 

इस एक्सप्रेस वे का लगभग 84 किलोमीटर का हिस्सा उत्तर प्रदेश में पड़ेगा, जो कि गोरखपुर देवरिया कुशीनगर होते हुए गुजरेगा। तथा यूपी से निकलने के बाद बिहार में प्रवेश करेगा। प्लान के अनुसार इस एक्सप्रेस-वे को घनी आबादी वाले क्षेत्रों से गुजारने का कोई इरादा नहीं है बल्कि इसे बिल्कुल सीधा रखने का प्लान शामिल है जिसका फायदा यह होगा कि शंकर बिल्कुल सीधी हो सकेंगे तथा सीधा होने का फ़ायदा इस एक्सप्रेस वे के लंबाई पर पड़ेगा लंबाई कम होगी तथा सफर में लगने वाला समय भी कम होगा, मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल निर्मित सड़क एवं रूटों के अनुसार गोरखपुर से सिलीगुड़ी के बीच की दूरी लगभग 637 किलोमीटर है।

 

एनएचएआई के निदेशक अरविंद कुमार के द्वारा मिली जानकारी के अनुसार इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा ज्ञात हो कि निर्माण की स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है, उन्होंने कहा कि सर्वे का कार्य भोपाल की एक एजेंसी को दिया जा चुका है। सिर्फ बिहार में लगभग 2731 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण इस एक्सप्रेस वे के लिए किया जाएगा जिस पर लगभग 25162 करोड रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।

 

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में 25 किलोमीटर पश्चिमी चंपारण जिले में 73 किलोमीटर शिवहर जिले में 16 किलोमीटर सीतामढ़ी जिले में 42 किलोमीटर मधुबनी जिले में 95 किलोमीटर सुपौल जिले में 32 किलोमीटर अररिया जिले में 49 किलोमीटर किशनगंज जिले में 63 किलोमीटर जमीन का अधिग्रहण करने का अंदेशा है। ऐसे में एक्सप्रेस वे के रास्ते में आने वाले जमीनों एवं जमीन मालिकों को भी इसका फायदा मिलने वाला है।

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