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बिहार राज्य में सफर के दौरान दुर्घटनाओं के लगातार मामले सामने आते सुनाई पड़ते हैं और ये संख्या लगातार बढ़ती भी जा रही है जिनमें कितनों की मृत्यु हो जाती है दुर्घटनाओं को रोकने हेतु और कम करने के लिए परिवहन विभाग ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया और सभी जिलों के डीएम को सख़्ती के साथ निर्देश दिया गया।

 

 

निर्देश के बाद विभाग ने रिव्यू किया और पाया जिलों में सड़क दुर्घटनाओं में कमी आई है। परंतु अभी 11 जिले ऐसे हैं जिनमें दुर्घटनाएं लगातार हो रही हैं, राज्य भर में हाईवे और ग्रामीण सड़कों पर साथ ही शहरी इलाकों में ये संख्या बढ़ती जा रही है जिसके बाबत दिन रात में पेट्रोलिंग करने का निर्देश दे दिया गया है। यही नहीं बल्कि कई जगहों पर ज्यादा से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं होती हैं ऐसे इलाकों को चिन्हित कर यातायात नियमों का पालन कराने के लिए दिशा निर्देश दिए गए।

 

 

यहां होती हैं अधिक दुर्घटनाएं

बता दें बिहार राज्य में एनएच पर सबसे ज्यादा दुर्घटना की संख्या है। और 2020 में लगभग 385 मौतें एनएच पर हुए हैं। हालांकि कुल मौतों की संख्या 6699 यानी 59% है जिसमें एनएचएआई के अंतर्गत वाली सड़कों पर 2517 मतलब के 17% और पथ निर्माण विभाग के अधीन एनएच रोड पर 768 मौतें हुई यानी 23% है। वहीं दूसरी ओर एसएच पर तकरीबन 1409 मौतें हो चुकी हैं इस तरह से टोटल मौतों की संख्या 21% है। एमडीआर तथा ग्रामीण सड़कों पर भी 2005 मौतें हो चुकी हैं। हालांकि कुल मौतों को यदि प्रतिशत में गणना की जाए तो यह 50 फ़ीसदी है।

 

उपर्युक्त संख्या को कम करने हेतु पेट्रोलिंग द्वारा मानना है, दुर्घटनाएं कम होंगी। साथ ही परिवहन विभाग ने जिलों को निर्देश देते हुए कहा तेज रफ्तार गाड़ियों पर रोक लगाई जाए और ना मानने वालो पर जुर्माना तथा बार बार पकड़े जाने पर लाइसेंस को भी जब्त किया जाए।

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