भारतीय रेलवे:  ट्रेनों में जारी नहीं रहेगी टीटीई की मनमानी । चलती ट्रेन में यात्रियों को बर्थ पाने के लिए टीटीई के सामने गिड़गिड़ाने या मिन्नत करने की जरूरत नहीं होगी। क्योंकि नई व्यवस्था के तहत एक बार बर्थ खाली होने के बाद आरएसी और वेटिंग टिकट धारक को अपने आप आवंटित हो जाएगी। यह नई व्यवस्था रेलवे के भागलपुर सेक्शन में चलने वाली ट्रेन संख्या 13071/13072 जमालपुर-हावड़ा एक्सप्रेस (सुपर फास्ट) पर लागू हो गई है।

 

भागलपुर में विक्रमशिला एक्सप्रेस, सूरत एक्सप्रेस, लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस (एलटीटी), वनांचल एक्सप्रेस, भागलपुर-यशवंतपुर आंग एक्सप्रेस, इंटरसिटी, साहिबगंज-भागलपुर-किऊल और भागलपुर-हंसडीहा खंड सहित लंबी दूरी की अन्य ट्रेनों में जल्द ही नई व्यवस्था लागू की जाएगी। रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था शुरू की है। ट्रेनों में मैनुअल चार्ट के बजाय, टीटीई आधुनिक, हैंड-हेल्ड स्टेशनों के साथ काम करेंगे।

 

इसके साथ ही टीटीई सफ़र के दौरान मनमाने ढंग से बर्थ आवंटित नहीं कर सकेंगे। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, टिकट चेक करने वाले कर्मचारियों को अब हैंड-हेल्ड टर्मिनलों से लैस किया जाएगा, न कि मैनुअल चार्ट से। नई व्यवस्था के लागू होने से आरएसी टिकट कंफर्म हो जाएंगे और बर्थ खाली होते ही यूस्पे यात्रा  कर सकेंगे। ट्रेन के नेट टर्न-अप के कारण खाली हुई बर्थ को एचएचटी पर फीड किया जाएगा। एक बार खाली बर्थ फीड हो जाने के बाद आरएसी बर्थ की पुष्टि की जाएगी। टिकट की पुष्टि की जानकारी यात्री के मोबाइल फोन पर पहुंच जाएगी।

 

आरएसी क्लियर होने पर  बर्थ खाली होने के बाद वेटिंग लिस्ट के यात्रियों के टिकट भी कंफर्म हो जाएंगे। इसकी जानकारीयात्रियों के मोबाइल फोन तक भी पहुंच जाएगी। एचएचटी के उपयोग से अनधिकृत फुटपाथ आवंटन पर अंकुश लगेगा। कतार में लगे यात्रियों की सुविधा के अलावा पारदर्शिता के साथ रियल टाइम बर्थ की उपलब्धता भी होगी। यह व्यवस्था 25 जुलाई से जमालपुर-हावड़ा एक्सप्रेस पर शुरू हुई जो भागलपुर से होकर चलती है।

 

इसे मालदा-हावड़ा इंटरसिटी पर भी लागू किया गया है। वहीं, रेलवे बोर्ड के निर्देश पर पूर्वी रेलवे के कई कर्मचारियों की प्रशिक्षण शुरू हो गई है। नई व्यवस्था तीन दिन पहले भागलपुर में जमालपुर-हावड़ा एक्सप्रेस रेलवे पर शुरू हुई थी। अन्य ट्रेनों के टीटीई स्टेशन जल्द ही आधुनिक हैंड-हेल्ड स्टेशनों से लैस होंगे। इस दिशा में पहल की जा रही है।

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