शुक्रवार, दिसम्बर 3

निर्भया के चारो गुनाहगारो में बिहार के अक्षय ने जेल में कमाया सबसे ज्यादा रुपैया, बाकियो ने इतना कमाया

दिल्ली के तिहाड़ जेल में सवेरे 5.30 बजे निर्भया के चारों गुनहगारों को आखिरकार गुनाह के सात साल बाद फांसी हुई, जिसे लेकर एक बार फिर न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास मजबूत हुआ है। गुरुवार को जिस तरह दिनभर और फिर आधी रात के बाद तक सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई चली, उसके बावजूद दोषियों के वकील फांसी की सजा को नहीं टाल सके और दोषियों को आज सुबह फांसी दे दी गई।

तिहाड़ जेल के निदेशक संदीप गोयल ने चारों की जांच कर उन्हें मृत घोषित किया। शायद ये पहली बार है जब तिहाड़ जेल में कड़ी सुरक्षा के बीच चार दोषियों को एक साथ फांसी दी गई है। फांसी के बाद चारों दोषियों, मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर और पवन गुप्ता के शवों को तिहाड़ जेल से दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल में ले जाया गया, जहां शवों का पोस्टमॉर्टम किया गया। पोस्टमॉर्टम के बाद ही शवों को चारों के परिजनों को सौंपा जाएगा।

इधर जानकारी मिली है कि जेल में रहने के दौरान बिहार के अक्षय ठाकुर ने सबसे ज़्यादा मज़दूरी कमाई तो वहीं, मुकेश सिंह ने काम न करने का विकल्प चुना था तो पवन गुप्ता ने मज़दूरी का काम किया था। जेल के नियम न मानने के लिए सबसे ज़्यादा बार सज़ा विनय शर्मा की दी गई थी। जेल में सात साल तीन महीने रहने के दौरान जेल में नियमों का पालन न करने के लिए विनय को 11 बार, पवन को आठ बार, मुकेश को तीन बार और अक्षय को एक ही बार सज़ा मिली थी।

 

जेल में अक्षय ने 69,000 रूपये , विनय ने 39,000 रूपये और पवन ने 29,000 रूपये कमाए थे। तिहाड़ जेल प्रशासन ने बताया कि निर्भया के दोषियों ने जेल में काम करके 1 लाख 37 हजार कमाए थे। इसमें मुकेश ने कोई काम नहीं किया था, जबकि अक्षय ने 69 हजार रुपये, पवन ने 29 हजार रुपये और विनय ने 39 हजार रुपये कमाए थे। इन पैसों को उनके परिवार वालों को दिया जाएगा। इसके साथ ही चारों दोषियों के कपड़ों और सामान को भी परिवारवालों को सौंपा जाएगा।

 

फांसी दिए जाने के बाद निर्भया की मां आशा देवी और पिता बद्रीनाथ सिंह दोनों बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा, “देश में महिलाओं के लिए ऐसा क़ानून बने जिससे लोगों को लंबा इंतज़ार न करना पड़े। निर्भया के मां आशा देवी ने न्यायपालिका का धन्यवाद करते हुए कहा, “मैं न्यायपालिका, मीडिया, राष्ट्रपति और आप सबका शुक्रिया अदा करती हूं। सात साल का संघर्ष आज अंजाम तक पहुंचा। आज का दिन हमारे बच्चियों और महिलाओँ के नाम है जब निर्भया को न्याय मिला है। मेरी बच्ची अब नहीं आएगी लेकिन हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे ताकि भारत की महिलाएं अधिक सुरक्षित हों।

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