चुनाव में गड़बड़ी और फर्जी वोटिंग जैसी घटनाओं को रोकने के लिए चुनाव आयोग ने वोटर आईडी कार्ड को आधार नंबर से जोड़ने की बड़ी पहल की है। हालांकि यह अभियान पूरी तरह से स्वैच्छिक होगा। यानी कोई भी व्यक्ति अपने वोटर कार्ड को आधार से लिंक करने के लिए स्वतंत्र होगा की उन्हे करनी है या नहीं। इसके आधार पर किसी भी व्यक्ति का आवेदन न तो खारिज किया जाएगा और न ही उसका नाम मतदाता सूची से हटाया जाएगा। इसके बावजूद यह अभियान 1 अगस्त 2022 से पूरे देश में शुरू हो जाएगा। जिसमें प्रत्येक घर से इससे जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी।

 

चुनाव आयोग के मुताबिक इसके लिए खास फॉर्म तैयार किया गया है। जिसके जरिए यह जानकारी ली जाएगी। साथ ही सभी राज्यों को इसे तुरंत लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस बीच आयोग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि आवेदकों के आधार नंबर को कार्रवाई करते समय निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। इस अवधि के दौरान किसी भी परिस्थिति में आधार संख्या को सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही, यदि किसी मतदाता का वोटर कार्ड कहीं प्रदर्शित करना आवश्यक है, तो आधार से संबंधित विवरण अनिवार्य रूप से ढक कर प्रस्तुत किया जाए।

 

# पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र में इस पहल की दी गई थी मंजूरी

आयोग की इस पहल को चुनावी सुधारों के सिलसिले में देखा जा रहा है। लंबे समय से चुनावी सुधारों पर काम कर रहे वोटर कार्ड को आधार नंबर से जोड़ने के चुनाव आयोग के प्रस्ताव को पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र में मंजूरी मिल गई थी। हालांकि यह अभियान अभी भी ऑनलाइन चलाया जा रहा है। हालांकि अब इसे घर-घर और हर मतदाता के बीच ले जाना होगा। गौरतलब है कि 2015 में चुनाव आयोग ने स्वैच्छिक रूप से  वोटर कार्ड को आधार से जोड़ने का अभियान शुरू किया था। उस वक्त 38 करोड़ वोटर कार्ड भी इससे जुड़े थे। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद आयोग ने पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी।

 

# यह मिलेगा फायदा 

वोटर कार्ड को आधार से लिंक करने का एक बड़ा फायदा यह है कि कोई भी व्यक्ति वोटर लिस्ट में दो जगह अपना नाम नहीं जोड़ पाएगा। इससे वह तुरंत पकड़ में आ जाएगा। अभी  बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग शहर में काम की तलाश में आते हैं और यहां भी वोटर सूची में अपना नाम दर्ज करवाते हैं। ऐसे में उनका नाम वोटर लिस्ट में दो जगह मौजूद रहता है। इसके साथ ही सही नंबर मिलने से योजना तैयार करने में आसानी होगी।

 

# 17 साल से ज्यादा उम्र होते ही वोटर कार्ड के लिए कर सकेंगे आवेदन

चुनाव सुधारों की दिशा में आयोग ने एक और बड़ा कदम उठाया है, जिसके तहत कोई भी व्यक्ति 17 वर्ष की आयु पूरी करते ही वोटर सूची में पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकेगा। इसके साथ ही अब साल में चार बार यानी हर तीन महीने में वोटर सूची में नाम जुड़ जाएंगे। ऐसे में जैसे ही वह 18 वर्ष की आयु पूरी करेगा, उसका नाम वोटर सूची में शामिल हो जाएगा। इसके तहत वोटर सूची में नाम दर्ज कराने के लिए 18 साल की उम्र पूरी होने का इंतजार नहीं करना  होगा।

 

नए नियमों के तहत वोटर सूची में नाम जोड़ने का काम एक जनवरी, एक अप्रैल, एक जुलाई और एक अक्टूबर को किया जाएगा। इस बीच, जैसे ही आवेदक इन तिथियों पर 18 वर्ष की आयु पूरी करता है, उसका नाम वोटर सूची में शामिल हो जाएगा। वोटर सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए अब तक लोगों को एक जनवरी तक इंतजार करना पड़ता था। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति ने 1 जनवरी के बाद 18 साल पूरे कर लिए हैं तो उसे अगले साल की 1 जनवरी तक इंतजार करना करना होता था। इसके साथ ही आयोग ने राज्यों को  मतदान केंद्रों को युक्तीकरण बनाने, मतदाता सूची में एक ही नाम की कई  बार दर्ज होने जैसे मुद्दों से प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए है। बता दें कि आयोग ने यह पहल तब तक की है जब इस साल के अंत तक गुजरात, हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है।

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