सोमवार, नवम्बर 29

गोरखपुर में 5000 करोड़ से बनेगा फोरलेन एक्सप्रेसवे, सीएम योगी ने खोला खजाना ये शहर मालामाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार इस बार चार एक्सप्रेसवे के काम की रफ्तार और बढ़ाने जा रही है। वित्तीय वर्ष 2020-21 का बजट दो रोज बाद विधानसभा में पेश होना है। इसके जरिए सरकार अपना बड़ा खजाना खोलने जा रही है। इसके अलावा डिफेंस एक्सपो के बाद डिफेंस कारीडोर के लिए बड़ी रकम का इंतजाम किया जाएगा। यूपीडा ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे व गंगा एक्सप्रेसवे के काम के लिए 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बजट में मांगी है। इसमें सबसे ज्यादा रकम तो गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया है कि इसी साल के आखिरी में गंगा एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास कराके उसका निर्माण शुरू होना है। इसके लिए 5 हजार करोड़ की रकम मांगी गई है। इसका उपयोग एक्सप्रेसवे के लिए जमीन खरीद में होगा।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का तोहफा इस साल दीपावली पर मिलेगा। इसका निर्माण कार्य काफी तेज गति से चल रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए यूपीडा को जमीन खरीद, ब्याज भुगतान, निर्माण कार्य व यूटीलिटी शिफ्टिंग आदि मदों में 3218.81 करोड़ की जरूरत है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 664.33 करोड़ की जरूरत है। यह एक्सप्रेसवे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के लिए आधारशिला इसी महीने 29 को प्रधानमंत्री रखेंगे। बुंदेलखंड एक्सप्रेस के लिए 1803. 76 करोड़ रुपये की जरूरत है।

 

 

बुंदेलखंड हर घर जल योजना पर जोर
अटल आवासीय विद्यालयों के लिए खुलेगा खजाना
दूसरे राज्यों से शराब की तस्करी रोकने के लिए आबकारी विभाग की ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम के लिए धन की जरूरत होगी।
कृषि के बजट में सारी माथापच्ची 1200 करोड़ बचाने की
कृषि विभाग का इस साल का बजट भी पिछले साल की भांति 6000 करोड़ रुपये के आसपास ही है। कृषि के बजट में सारी माथापच्ची बिजली विभाग को एकमुश्त दिए जाने वाले 1200 करोड़ रुपये बचाने की है। विभाग इस राशि को केंद्र सरकार द्वारा शुरू करने वाले सोलर पंप की कुसुम्ब योजना में राज्यांश के रूप में परिवर्तित करना चाहता है।

लगेंगे दो लाख सोलर पंप
केंद्र सरकार ने अपने बजट में देश में कुसुम्ब योजना के तहत 20 लाख सोलर पम्प लगाने का लक्ष्य रखा है। आकार और जनसंख्या को आधार माने तो भी यूपी के हिस्से में उसका 10 प्रतिशत हिस्सा तो कम से कम आएगा ही। इसके अनुसार 10 फीसदी हिस्से के अनुसार यूपी में दो लाख सोलर पम्प लगेंगे। योजना में 30 प्रतिशत राशि किसान को तो 30 फीसदी राज्य सरकार और 40 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार को लगानी है।

 

 

कृषि विभाग राज्यांश के इसी 30 फीसदी राशि को बचाना चाहता है। यह राशि भी उसी के बजट से जाएगी। विभाग हर साल बिना किसी हिसाब-किताब के किसानों को नलकूप के लिए अनुदानित दर पर बिजली आपूर्ति के नाम पर विद्युत विभाग को 1200 करोड़ रुपये का भुगतान करता है।

 

हालांकि विभाग इस राशि के भुगतान को लेकर सरकार के समक्ष हमेशा आपत्तियां दर्ज कराता रहा है कि उसे इस भुगतान का कोई लेखा-जोखा बिजली विभाग से प्राप्त नहीं होता जबकि उसका अधिकार है कि उसने जो भुगतान किया उस राशि का इस्तेमाल बिजली विभाग ने किस मद में और कहां-कहां किया है उसके बारे में बताए।

 

 

कृषि विभाग इस बड़ी राशि के भुगतान को फालतू का भुगतान मानकर इसे देने से हर बार मना करता है लेकिन सरकार दबाव बनाकर उससे यह भुगतान करा देती है। इस बार कृषि विभाग ने बिजली विभाग को दी जाने वाली राशि को कुसुम्ब योजना में दिए जाने वाले राज्यांश में परिवर्तित कराने का जोर लगाया है।

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