सोमवार, नवम्बर 29

गोरखपुर में इन 58 स्थानों पर लगा बैरियर, 1100 सिपाही तैनात इंचार्ज को मिला पूर्ण रोक का आदेश

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए जी-जान से जुटी गोरखपुर पुलिस ने शहर के इंट्री प्वाइंट के साथ ही अंदरूनी हिस्से में 58 स्थानों पर बैरियर लगाकर मोर्चेबंदी की है। लोगों की आवाजाही पर रोक लगाने के लए शहरी क्षेत्र में 11 सौ सिपाही, दारोगा तैनात किए गए हैं। ग्रामीण इलाकों में थाने और चौकियों पर तैनात पुलिस वाले सक्रिय रहकर संक्रमण रोकने के अभियान में जुटे हुए हैं। पुलिस अधिकारी भी भ्रमण पर रहकर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

 

 

बाहर से शहर में आने पर पूरी तरह से रोक लगी हुई है। इसके लिए शहर के सभी इंट्री प्वाइंट पर बैरियर लगाए गए हैं। साथ ही शहर के अंदर भी प्रमुख रास्तों पर भी बैरियर लगाए गए हैं। सभी बैरियरों पर बड़ी संख्या पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा चौराहों पर भी पुलिस तैनात की गई है। प्रमुख सड़कों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लगातार गश्त की जा रही है। पुलिसकर्मियों की आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में ड्यूटी लगाई गई है। ग्रामीण इलाकों में क्षेत्राधिकारियों, थानेदारों और चौकी इंचार्जों को लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। एसपी नार्थ और एसपी साउथ को भी अपने इलाके में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है। एडीजी दावा शेरपा, डीआइजी राजेश मोदक, एसएसपी डॉ. सुनील गुप्त और एसपी सिटी डॉ. कौस्तुभ तथा सभी क्षेत्राधिकारी दिनभर अपने-अपने क्षेत्र में भ्रमण पर रहकर हालात पर नजर रख रहे हैं।

 

 

लॉकडाउन के पहले दिन जिला अस्पताल की ओपीडी में सन्नाटा पसरा रहा। कुल तीन सौ मरीज देखे गए, जिसमें से ढाई सौ केवल फ्लू कार्नर आए। इनमें से विदेश से आए व उनके संपर्क में रहे पांच लोगों को होम क्वारंटाइन की सलाह दी गई। उनके हाथों पर होम क्वारंटाइन की मुहर भी लगाई गई। उनके बारे में पूरी जानकारी रजिस्टर में दर्ज कर ली गई। फ्लू कार्नर में पहुंचने वाले ज्यादातर मरीज सर्दी, खांसी, जुकाम से पीडि़त थे। जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में कुल 49 मरीज पहुंची, जिनमें से 15 को भर्ती किया गया।

 

विदेश से आए चार लोगों में एक व्यक्ति 16 मार्च को इराक से आया था, वह अपने साथ अपनी पत्नी को भी जांच कराने लाया था। 18 मार्च को दुबई, 20 मार्च को साउथ अफ्रीका व 25 मार्च को यूएसए से एक-एक व्यक्ति आए थे। वे भी जांच कराने फ्लू कार्नर में पहुंचे। किसी में कोरोना के लक्षण नहीं मिले, लेकिन एहतियातन उन्हें 14 दिन होम क्वारंटाइन में जाने की सलाह दी गई। उन्हें कहा गया कि कोई परेशानी होने पर वे तत्काल कंट्रोल रूम को फोन करें या अस्पताल आ जाएं। जिला अस्पताल व जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में सन्नाटा पसरा था। आमतौर पर प्रतिदिन मरीजों से भरी रहने वाली ओपीडी लगभग खाली थी। केवल जरूरी ओपीडी खुली थी, उसमें भी मरीजों की संख्या दो-चार ही रही। डॉक्टर दो बजे तक बैठे मरीजों का इंतजार करते रहे।

 

 

धुरियापार क्षेत्र के विभिन्न गांवों में विदेश से आए 15 लोगों को एकांत में रहने की हिदायत दी गई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. जेपी तिवारी ने बताया कि उरुवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत अमोढ़ा, इंद्रापार बुजुर्ग, नगवा प्रेम, बेलासपुर, मठ केशव, पांडेयपुर, लोन्द्रा, टाडी, बेसहनी, देवराजपार में विदेश से आए 15 लोगों की जांच टीम भेजकर कराई गई। जांच में कोई गंभीर बीमारी के लक्षण नहीं मिले, इसके बावजूद एहतियात के तौर पर परिवार से अलग एकांत में रहने की उन्हें हिदायत दी गई है। साथ ही गांव में घूमने से भी मना कर दिया गया है।

जिला अस्पताल में बने आइसोलेशन वार्ड में कोरोना से जंग के लिए योद्धा तैयार हैं। 23 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। कैंसर वार्ड में पांच बेड हैं जिसमें तीन पर वेंटीलेटर लगे हैं। उसी के बगल में स्पेशल वार्ड में 18 बेड हैं। तीन डॉक्टर, 16 स्वास्थ्य कर्मियों को तैनात किया गया है, जिसमें 10 स्टाफ नर्स, तीन वार्ड ब्वाय व तीन सफाई कर्मी हैं। सोमवार को डॉ. वीके सुमन व डॉ. राजेश कुमार के साथ पैरामेडिकल स्टॉफ पूरी तैयारी के साथ वार्ड में मुस्तैद था।

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