इस कोरोना महामारी के समय में रेलवे स्टेशन पर उतरने वाले यात्रियों को घर जाने के लिए रोडवेज बसें वर्तमान समय में उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। और शाम के बाद ये परेशानिया और भी बढ़ जाती है, पूर्वांचल के दूर-दूर के कस्बों तथा बिहार राज्य के सैकड़ों लोग रेलवे स्टेशन पर रात काटने को मजबूर हैं। कोरोना काल में लोग इधर उधर धक्के खाने पर मजबूर हो रहे हैं। कोरोना महामारी प्रोटोकॉल का पालन भी तार तार हो रहा है।

 

 

रोजी रोटी की फिराक में गए थे लोग महाराष्ट्र

तेजी से बढ़ रहे संक्रमण के पहले रोजी रोटी के फिराक में महाराष्ट्र गए लोग पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा बिहार के लोग अभी अलर्ट हो गए हैं। पिछले वर्ष वाले हालात फिर से पैदा होने से वह घर वापस जाने का प्रयत्न कर रहे हैं, परंतु रोडवेज बसें नहीं उपलब्ध हो पा रही है। लोगों की बढ़ती संख्या को देख रेलवे बोर्ड स्पेशल ट्रेने भी चला रहा है। हालात यह है के मुंबई तथा पुणे से प्रतिदिन तकरीबन 10,000 लोग गोरखपुर पहुंच रहे हैं।

 

 

इन क्षेत्रों के लिए उपलब्ध नहीं है बसें

गोरखपुर से बिहार राज्य के सीमावर्ती क्षेत्र देवरिया, रुद्रपुर कुशीनगर तमकुही पडरौना महाराजगंज ठूठीबारी के लिए बसें उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जिससे यात्री परेशान हैं। एक तरफ कर्फ्यू है और शाम होते ही बस डिपो में खड़ी हो जाती हैं। वहीं दर्जन बसें पंचायत चुनाव में भी लगी हैं

 

प्राइवेट वाहन चालक प्रवासियों की मजबूरी का उठा रहे हैं फायदा

प्राइवेट वाहन चालक आपदा के कारण प्रवासियों की मजबूरी का लाभ उठा रहे हैं और मनमाना किराया भी वसूल रहे हैं। प्राइवेट बसें मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, सिवान तथा छपरा के लोगों को बैठा रहे हैं और बिहार के सीमाई एरिया में ले जाकर उन्हें उतार देते हैं। बिहार राज्य ही नहीं पूर्वांचल के लोग भी यहां पर ठगे जा रहे हैं। रोडवेज की बसें डिपो कैंपस में मिले या फिर ना मिले परंतु डीपो के समीप प्राइवेट बसें 24 घंटे लगी रहती हैं। उसके चालक परिचालक रेलवे स्टेशन के सामने तथा डिपो कैंपस में घुसकर बिहार तथा खास कस्बों के यात्रियों को अपनी बस तक ले जाते हैं और रास्ते में मनमाना किराया भी वसूलते हैं। यही नहीं बल्कि उनको मनमाना किराया वसूल कर बीच रास्ते में ही छोड़ देते हैं।

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